ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह स्थानीय निकाय चुनावों में 50 फीसदी से अधिक आरक्षण न दे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर यह सीमा पार हुई तो चुनाव रोक दिए जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि चुनाव 2022 की बंथिया आयोग रिपोर्ट से पहले की स्थिति के अनुसार ही हों और रिपोर्ट अभी लंबित है।
उच्चतम न्यायालय
में याचिका दायर कर बंबई उच्च न्यायालय
के उस अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें उच्च न्यायालय
ने 10 फीसदी मराठा आरक्षण पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। बंबईउच्चन्यायालयने 11 जून को अपने अंतरिम आदेश में महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण लागू करने की अनुमति दे दी थी।
महाराष्ट्र विधानमंडल ने 20 फरवरी, 2024 को महाराष्ट्र राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के आधार पर कानून पारित किया था। रिपोर्ट में मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए असाधारण परिस्थितियों का जिक्र किया गया जो राज्य में 50 फीसदी कुल आरक्षण की सीमा से अधिक है।
उच्चतम न्यायालय ने 2021 में 2018 में बनाए गए पहले के मराठा आरक्षण के कानून को निरस्त कर दिया था। 2018 के आरक्षण में 16 फीसदी आरक्षण दिया गया था।