अटाला मस्जिद मामले की सुनवाई टली,कोर्ट ने अगली तारीख 26 फरवरी तय की

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यह वाद स्वराज वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा ने पीस कमेटी जामा मस्जिद (अटाला मस्जिद) मोहल्ला सिपाह के खिलाफ दायर किया है। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह स्थल मूल रूप से अटला माता का एक मंदिर था। याचिका के अनुसार, 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र ने यहां अटला देवी की मूर्ति स्थापित कर एक मंदिर बनवाया था, जहां लोग पूजा-अर्चना करते थे। बाद में, 13वीं शताब्दी में ही फिरोज शाह तुगलक ने जौनपुर पर आक्रमण कर अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया। तुगलक ने अटाला देवी मंदिर की भव्यता देखकर उसमें तोड़फोड़ कराई। हालांकि, हिंदू धर्मावलम्बियों के प्रबल विरोध के कारण वह इसे पूरी तरह ध्वस्त नहीं कर पाया। इसके बजाय, मंदिर के खंभों पर ही मस्जिद का आकार दिया गया, जो वर्तमान में अटाला मस्जिद के नाम से जानी जाती है।

वर्तमान में, यहां इस्लाम धर्म के लोग नमाज अदा करते हैं, जबकि सनातन धर्म के व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित है। वर्ष 1408 में शर्की शासक इब्राहिम शाह ने मंदिरों को मस्जिद का मुकम्मल आकार दिया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि अटाला मस्जिद वास्तव में अटाला देवी का मंदिर है। यह तथ्य इतिहासकार अबुल फजल की रचना ‘आईने अकबरी’ में भी मिलता है। रचनाओं में स्पष्ट है कि मंदिर के खंभों और अन्य हिस्सों पर आज भी हिंदू स्थापत्य कला और रीति-रिवाजों के चिन्ह व अवशेष मौजूद हैं। सनातन धर्मावलम्बियों को वहां पूजन-कीर्तन करने का अधिकार है।

इस मामले में जानकारी देते हुए हिंदू स्वराज वाहिनी के अधिवक्ता राम ने बताया कि मुंसफ शहर में हाईकोर्ट में चल रही इस केस की सुनवाई के कारण जनपद न्यायालय में सुनवाई की अगली तारीख 26 फरवरी तय किया है।