शाहपुर बेदी में माइनर के पानी से किसानों की फसलें जलमग्न, स्थायी समाधान की मांग

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ग्रामीणों के अनुसार माइनर से छोड़ा गया पानी नाले के सहारे गांव के तालाब में भर गया। तालाब के ओवरफ्लो होते ही पानी ने खेतों की ओर रास्ता बना लिया, जिससे आसपास के कई किसानों की फसलें जलभराव की चपेट में आ गईं। पानी भरने से गेहूं और लाही की फसलें सड़ने का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।

प्रभावित किसानों सलीम, उमाशंकर, चंद्रपाल सिंह और अरुण कुमार सिंह ने बताया कि यह समस्या पहली बार नहीं हुई है। पिछले कई वर्षों से जब भी माइनर में पानी छोड़ा जाता है, तब तालाब के ओवरफ्लो होने से खेतों में जलभराव हो जाता है। स्थायी समाधान न होने के कारण हर साल किसानों को इसी तरह नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों का कहना है कि विशेषकर सर्दी के मौसम में फसलें अधिक संवेदनशील होती हैं और पानी भरने से पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है।

वहीं नहर विभाग के जेई प्रदीप कुमार ने बताया कि टेल तक पानी पहुंचाने के उद्देश्य से माइनर में पानी छोड़ा जाता है। जैसे ही पानी भदसान माइनर तक पहुंचता है, वह नाले के रास्ते शाहपुर बेदी गांव के तालाब में चला जाता है। तालाब के भरते ही ओवरफ्लो पानी खेतों में फैल जाता है। फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तख्ता लगाकर पानी को कम कर दिया गया है, ताकि आगे नुकसान न हो।

किसानों ने प्रशासन और नहर विभाग से मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए, जिससे भविष्य में खेतों में जलभराव न हो। साथ ही उन्होंने फसल क्षति का आकलन कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में भी यही स्थिति बनी रहेगी।