एम एन एन आई टी के  पूर्व  प्रवक्ता को मिला दंड, हाईकोर्ट ने लघु दंड देने पर पुनर्विचार करने को कहा

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राजेश सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने दिया है। मामले के अनुसार याची की नियुक्ति एमएनएनआईटी में प्रवक्ता के पद पर 1999 में कम्प्यूटर साइंस विभाग में हुई थी। विभाग की एक पूर्व छात्रा ने 2003 में निदेशक से लिखित शिकायत की याची ने उससे उसकी इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संबंध बनाए। यह भी कहा कि उसके संस्थान छोड़ने के बाद भी उनके बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बने। दिखावे के लिए शादी भी हुई लेकिन दूसरे धर्म की होने के कारण याची के अभिभावक उनके विवाह के लिए राजी नहीं हुए। शिकायतकर्ता का कहना था कि उसका शारीरिक और भावनात्मक उत्पीड़न हुआ है।

इस शिकायत पर संस्थान ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। कमेटी जांच में किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कमेटी यह तय करने के लिए एक्सपर्ट नहीं है कि वास्तव में कोई दुष्कर्म हुआ है या नहीं। शिकायत संस्थान छोड़ने के बाद दर्ज़ कराई गई और दोनों में सहमति से संबंध थे। इस रिपोर्ट के आधार पर याची को निलंबित कर दिया गया और हाईकोर्ट के रिटायर जज की एकल जांच कमेटी गठित कर दी गई। एकल जांच कमेटी ने याची को नैतिकता का दोषी पाते हुए बर्खास्त करने की सिफारिश की। इसके आधार पर बोर्ड ऑफ गवर्नेंस ने याची को बर्खास्त कर दिया।

इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता ने जांच प्रकिया पर सवाल उठाए। कहा कि जांच के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया। याची को प्रतिवाद करने का अवसर भी नहीं मिला जबकि संस्थान के अधिवक्ता का कहना था कि याची एक शिक्षक से अपेक्षित नैतिकता का पालन नहीं कर सका।

कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि याची को सेवा से बर्खास्त करने का एकमात्र कारण नैतिकता बताई गई है। लेकिन इस एक आरोप के अलावा उस पर अन्य कोई आरोप नहीं है जबकि शिकायत से तीन वर्ष पूर्व से वह नौकरी में था। अगर उसने शिकायतकर्ता से शादी कर ली होती तो यह शिकायत भी नहीं होती। कोर्ट ने कहा कि नैतिकता का मूल्यांकन याची के समूचे कार्य व्यवहार को देखकर किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यह यौन शोषण का मामला नहीं है इसलिए याची को दिया गया दंड आश्चर्यजनक रूप से ज्यादा है। कोर्ट ने दंड की मात्रा पर फिर से विचार करने के लिए प्रकरण अनुशासनात्मक प्राधिकारी को वापस भेज दिया है और उन्हें नए सिरे से इस पर विचार को कहा है।