‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने की बाड़मेर के किसान पनाराम सारण की सराहना

Spread the love

बाड़मेर, 25 जनवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस बार बाड़मेर जिले के रामसर क्षेत्र के किसान का उल्लेख कर उनके प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने श्रीअन्न (मिलेट्स) को लेकर हो रहे नवाचारों का जिक्र करते हुए रामसर के किसानों के काम को देशभर के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रामसर में किसान श्रीअन्न को लेकर इनोवेशन कर रहे हैं। यहां की रामसर ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से 900 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान बाजरे की प्रोसेसिंग कर उससे खाने योग्य लड्डू तैयार कर रहे हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है। इसके साथ ही कई मंदिर ऐसे हैं, जहां प्रसाद में सिर्फ मिलेट्स का ही उपयोग किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री द्वारा जिन किसान का उल्लेख किया गया, वे पनाराम सारण पुत्र इसराराम बाड़मेर जिले की रामसर तहसील के खड़ीन गांव के निवासी हैं। पनाराम ने वर्ष 2023 में बाजरे से बने उत्पादों का काम शुरू किया था। आज उनके बनाए बाजरे के लड्डू और बिस्किट न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि देशभर में पहचान बना रहे हैं।

किसान पनाराम सारण ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा उनकी कंपनी और कार्य का जिक्र किया जाना उनके लिए गर्व और सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि मुझे बहुत खुशी हुई कि प्रधानमंत्री ने मेरा और मेरी कंपनी का नाम लेकर सराहना की। सच कहूं तो मैं खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं। यह मेरे जीवन का बेहद गौरवशाली पल है।

रामसर के खड़ीन गांव में पनाराम द्वारा पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से बाजरे के लड्डू और बिस्किट हाथों से तैयार किए जाते हैं। इन उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में भेजा जाता है। मांग के अनुसार ही प्रोडक्ट तैयार किए जाते हैं, ताकि गुणवत्ता और शुद्धता बनी रहे।

पनाराम ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत के प्रस्ताव पर 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया गया था। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिलेट्स को बढ़ावा देने की अपील की थी।

पनाराम ने कहा कि पीएम मोदी ने मिलेट्स को प्रमोट करने की बात कही थी, हमने वही किया। तभी बाजरे के लड्डू और बिस्किट बनाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेजन, माई स्टोर जैसी वेबसाइट्स पर प्रोडक्ट्स के सैंपल अपलोड किए गए। धीरे-धीरे अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा और ऑनलाइन ऑर्डर आने शुरू हो गए।

पनाराम के अनुसार उनके प्रोडक्ट पूरी तरह ऑर्गेनिक होते हैं, इसलिए लंबे समय तक स्टोर नहीं किए जाते। ऑर्डर मिलने पर ही निर्माण किया जाता है। बड़े ऑर्डर आने पर आसपास के किसानों को भी इस काम से जोड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि इलाके में साल में एक ही बार बारिश पर खेती निर्भर है, ऐसे में उसी समय ऑर्गेनिक बाजरा एकत्र किया जाता है। उनका उद्देश्य है कि काम चाहे कम हो, लेकिन पूरी तरह शुद्ध हो।

पनाराम ने बताया कि दिल्ली में एक सेमिनार के दौरान उन्हें बाजरे से जुड़े उत्पादों और ऑनलाइन मार्केटिंग की जानकारी मिली। वहीं उनकी ऑनलाइन आईडी बनाई गई और कंपनी का रजिस्ट्रेशन कराया गया। इसके बाद उनकी ऑनलाइन मौजूदगी मजबूत हुई और बिक्री बढ़ने लगी।