जयपुर, 03 फ़रवरी । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सहकारिता आंदोलन को नई पहचान और स्पष्ट दिशा मिल रही है। सहकारिता को सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा पृथक सहकारिता मंत्रालय का गठन किया गया है, जिस पर केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह विशेष ध्यान दे रहे हैं। यह बात सहकारिता विभाग की सचिव व रजिस्ट्रार आनंदी ने कही।
आनंदी जयपुर में कृषक भारती को-ऑपरेटिव लिमिटेड (कृभको) द्वारा राजस्थान के लिए आयोजित व्यापार योजना समीक्षा एवं योजना बैठक 2026–27 को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा कि पहले सहकारिता कृषि मंत्रालय का हिस्सा थी, लेकिन अब इसका दायरा और भूमिका दोनों विस्तृत हो चुके हैं। राजस्थान में सहकारिता के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और कृषि के साथ-साथ उद्योग क्षेत्र में भी सहकारिता के माध्यम से प्रभावी कार्य हो रहे हैं। उन्होंने राजस्थान के किसानों के हित में कृभको द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताया।
आनंदी ने कहा कि पहले किसानों तक केवल बीज और खाद उपलब्ध कराना ही लक्ष्य माना जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सोच को बदला है। अब किसानों की आय बढ़ाना प्राथमिक उद्देश्य है। सभी योजनाएं और कार्यक्रम किसानों की आमदनी बढ़ाने पर केंद्रित होने चाहिए। इसी सोच के अनुरूप कृभको अपनी योजनाओं को प्रभावी ढंग से क्रियान्वित कर रहा है।
उन्होंने इस बैठक को न केवल कृभको बल्कि राजस्थान राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण बताया।
इस अवसर पर कृभको के निदेशक (वित्त एवं विपणन) मनीष कुमार ने कहा कि कृभको देशभर में, विशेषकर राजस्थान जैसे कृषि-प्रधान राज्यों में, किसानों की समृद्धि को ध्यान में रखकर कार्य कर रहा है। उन्नत उर्वरकों की समय पर आपूर्ति, सहकारी संस्थाओं को मजबूत करना और किसान-हितैषी पहलों के जरिए खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कृभको के उप महाप्रबंधक (विपणन, उत्तर) गजेंद्र कुमार ने कहा कि राजस्थान जैसे विशाल और विविध कृषि परिस्थितियों वाले राज्य में कृभको जमीनी स्तर पर किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य कर रहा है। उर्वरकों की समय पर आपूर्ति, सहकारी समितियों के साथ समन्वय तथा किसान-केंद्रित विपणन गतिविधियों से कृषि विकास को गति मिल रही है। जागरूकता शिविरों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में मदद मिल रही है।
बैठक में बताया गया कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, जहां कृषि मुख्य रूप से मानसून और सीमित सिंचाई संसाधनों पर निर्भर है। राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कृषि के अंतर्गत आता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका को दर्शाता है।
उर्वरक बाजार की स्थिति पर चर्चा करते हुए संतुलित पोषण और कुशल इनपुट प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया गया। कृभको द्वारा राज्य में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जैव उर्वरक, जिंक सल्फेट, बीज सहित अन्य कृषि उत्पादों की आपूर्ति कर किसानों की आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है।
कृभको प्रबंधन ने वर्ष 2026–27 के लिए उर्वरक उपलब्धता को मजबूत करने, वितरण नेटवर्क के विस्तार, किसान-केंद्रित सेवाओं और उत्पाद मिश्रण में सुधार की रणनीति साझा की। इस अवसर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया। समापन अवसर पर आगामी कार्ययोजना पर मार्गदर्शन दिया गया और राजस्थान में कृषि विकास तथा किसानों की आय बढ़ाने में कृभको की निरंतर भूमिका दोहराई गई।
बैठक में कृभको के राज्य प्रबंधक (विपणन) आर.एस. राठौड़, संयुक्त महाप्रबंधक तेजिंदर कुमार, प्रदीप कुमार, उप महाप्रबंधक अजय सिंह तथा संयुक्त महाप्रबंधक (विपणन एवं जनसंपर्क) वी.के. तिवारी सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।