जोधपुर, 03 फरवरी । जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जोधपुर (द्वितीय पीठ) ने डाक जीवन बीमा (पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस) के मृत्यु दावा निपटान में अनावश्यक देरी और लापरवाही को सेवा में स्पष्ट कमी मानते हुए डाक विभाग के विरुद्ध अहम निर्णय पारित किया है। यह निर्णय आयोग के अध्यक्ष डॉ. यतीश कुमार शर्मा एवं सदस्य डॉ. अनुराधा व्यास द्वारा दिया गया।
आयोग ने अपने आदेश में डाक विभाग को निर्देश दिया कि वह परिवादी को डाक जीवन बीमा पॉलिसियों के अंतर्गत देय कुल बीमा राशि का 75 प्रतिशत अर्थात 15 लाख 45 दिनों के भीतर अदा करे। प्रकरण में परिवादी द्वारा अपनी पत्नी के निधन के पश्चात समय पर मृत्यु दावा प्रस्तुत किया गया था। परिवादी ने सभी आवश्यक चिकित्सीय, सेवा एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराए, इसके बावजूद विभाग द्वारा लंबे समय तक दावा लंबित रखा गया और बार-बार अनावश्यक दस्तावेजों की माँग की जाती रही।
आयोग ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि बीमा दावा प्राप्त होने के बाद सेवा प्रदाता का दायित्व है कि वह युक्तिसंगत समय सीमा में दावा स्वीकार या अस्वीकार करे। केवल विभागीय जाँच के नाम पर अनिश्चितकाल तक दावा लंबित रखना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के प्रावधानों के विपरीत है। आयोग ने यह भी कहा कि डाक जीवन बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा योजना में विभाग की जिम्मेदारी और अधिक संवेदनशील हो जाती है तथा बिना ठोस और प्रमाणिक साक्ष्य के बीमारी छिपाने का आरोप लगाकर दावा रोके रखना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। इसके अतिरिक्त आयोग ने परिवादी को मानसिक पीड़ा एवं सेवा में कमी के लिए ₹50 हजार क्षतिपूर्ति तथा 10 हजार वाद व्यय प्रदान करने का भी आदेश दिया है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर देय राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह निर्णय उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक सशक्त संदेश देता है कि बीमा दावों में अनावश्यक देरी और उदासीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा