अंतर्राष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव सिर पर, मरम्मत के नाम पर पैसे की बर्बादी, लीपापोती करके निभाई जा रही है स्वच्छता की रस्में

Spread the love

मंडी, 07 फ़रवरी । छोटी काशी मंडी में देवी आठ दिवसीय शिवरात्रि महोत्सव शुरू होने में महज एक सप्ताह का समय ही बचा है। लगभग पांच करोड़ खर्च करके यह आयोजन मनाया जाना है। एक तरफ मेला मैदान पड्डल में तैयारियां चल रही हैं तो सबसे हैरान कर देने वाली गतिविधि यह है कि स्टेडियम की सीढ़ियों को चौड़ा व मरम्मत करने का काम अब किया जा रहा है। जिस तरह से यह काम चल रहा है उससे साफ दिखता है कि यह शिवरात्रि वाले दिन तक ही पूरा होगा। अब लाखों लोग इस मेले में आते हैं, पूरी सीढ़ियों देवलुओं व लोगों से भरी रहती है, ऐसे में जो रेत बजरी और सीमेंट का काम किया जा रहा है वह किसी के गले नहीं उतर रहा है। जानकार जानते हैं सीमेंट की सैटिंग के लिए कम से कम दो तीन सप्ताह का समय चाहिए और यदि इससे पहले इस पर चलना फिरना या बैठना शुरू हो जाए तो यह टूट जाता है। दो महीने पहले इस काम को करने का निर्णय आम सभा की बैठक में लिया गया था मगर काम अब जाकर शुरू किया गया जो साफ तौर पर पैसे की बर्बादी माना जा रहा है। शहर के अन्य भागों में भी इसी तरह की लीपापोती का दौर जारी है।

सुकेती खड्ड के पुल की रेलिंग व रास्तों की भी मरम्मत की जा रही है। यहां पर भी लोगों का हर समय रेला रहता है। किसी को रोकना मुमकिन नहीं है। ऐसे में यह काम महज एक औपचारिकता मात्र है। लोगों द्वारा दिए गए पैसे से इस महोत्सव का आयोजन होता है और लोगों का पैसा इस तरह से बर्बाद हो रहा है। शहर को फोरलेन से जोड़ने वाली कांगणी जंगल वाली सड़क में इन दिनों मिट्टी बिछाई जा रही है। इस सड़क पर हर वक्त वाहनों की कतार रहती हैं क्योंकि शहर का प्रवेश द्वार है तथा अधिकतर वाहन फोरलेन से होकर इसी मार्ग से शहर में आ रहे हैं। ऐसे में यहां पर धूल ही धूल उड़ रही है। ऐसे में शिवरात्रि में आने वालों का धूल से जोरदार स्वागत का पूरा इंतजाम हो चुका है। शहर को चकाचौंध करने के नाम पर रंग रोगन हो रहा है। सभी शौचालयों में भी रंग रोगन किया जा रहा है। रोचक यह है कि इसी क्रम में शहर के ऐतिहासिक जैंचू नौण पर स्थित शौचालय का रंग रोगन देखने वाला है। इसकी एक दीवार जो पर्दे का काम करती है में पोचा लगाकर बाकी को यूं ही गंदा छोड़ दिया गया यानी रंग रोगन के नाम पर मजाक किया गया है और यह केवल जमा खर्च ही दिख रहा है। इसे देखने वाले व्यवस्था को खूब कोस रहे हैं।

शहर के प्रवेश द्वार पर विश्वकर्मा की पहाड़ी को ठीक करने का काम जो कछुआ चाल से चल रहा है वह अभी तक पूरा नहीं हुआ। शिवरात्रि तक भी पूरा होने के आसार नहीं लग रहे हैं। इस चौक पर गंदगी, मिट्टी, मलबा व ठेकेदार के कबाड़ के अंबार लगे हैं। महाशिवरात्रि पर्व प्रदेश का बड़ा देव समागम हैं। सैंकड़ों ग्रामीण देवी देवता अपने हजारों देवलुओं व भक्तों के साथ मेले में आएंगे। साल के आरंभ में यही सबसे पहला मेला है जिससे प्रदेश में मेलों की शुरूआत होती है। इसमें करोड़ों खर्च करके की जा रही प्रबंध व्यवस्थाओं को देख कर कई तरह के कयास लोग लगा रहे हैं।