पाठ्यक्रम में शामिल हुईं पवन चौहान की कहानियां

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मंडी, 07 फ़रवरी । एक बार फिर साहित्यकार पवन चौहान के नाम एक अन्य उपलब्धि जुड़ गई है। इस बार पवन चौहान की दो बाल कहानियां सी०बी०एस०ई० और आई०सी०एस०ई० संबद्ध निजी विद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जाएंगी। ये कहानियां दूसरी और पांचवीं कक्षा के बच्चे सत्र 2025-26 से अपने अतिरिक्त पठन के अंतर्गत पढेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 की दूरदर्शी भावना के अनुरूप तैयार की गई ‘आनंदी कहानी संचय’ पुस्तक श्रृंखला विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह पुस्तकें भाषा-ज्ञान के साथ-साथ मूल्यबोध, संस्कार, देश-प्रेम, भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं, जेंडर समानता और पर्यावरणीय चेतना को भी सशक्त रूप से पोषित करती हैं। वोल्ट की पाठ्यपुस्तक श्रृंखला ‘आनंदी’ कहानी संचय के अंतर्गत इन्हें देशभर के विद्यार्थी पढेंगे।

कक्षा दूसरी में शामिल पवन की कहानी बाय चींटियों अच्छी आदत और कक्षा पांचवीं की कहानी ‘कृपया रुक जाओ!’ खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी मूल्य परोसती है। इन पुस्तकों का संकलन एवं संपादन भाषाविद् एवं बाल साहित्यकार गुरप्रीत शर्मा ने किया है। उल्लेखनीय है कि पवन चौहान की रचनाएं इससे पूर्व भी विभिन्न सरकारी व निजी विद्यालयों तथा केरल व महाराष्ट्र के विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

पवन कविता, कहानी, बाल कहानी, फीचर लेखन में बराबर सक्रीय हैं। पवन ने वर्ष 2014 में ‘राष्ट्रीय सहारा’ समाचार पत्र की रविवारीय मैगजीन ‘उमंग’ में ‘टूर’ नाम से पर्यटन पर नियमित स्तंभ भी लिखा है। साथ ही, कुछ पत्रिकाओं के बाल साहित्य विशेषांकों का अतिथि संपादन भी किया है। बाल साहित्य में इनका कार्य प्रशंसनीय है। पवन चौहान हिंदी के प्रवक्ता हैं। इनकी अब तक भिन्न-भिन्न विषयों की ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। यही नहीं, हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला से ‘पवन चौहान की बाल कहानियों का आलोचनात्मक विश्लेषण’ विषय पर लघु शोध भी हुआ है।