उदयपुर शहर में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या अब विकराल रूप लेती जा रही है। त्योहारों, विवाह समारोहों और पर्यटन के पीक सीजन में लगभग पूरा शहर जाम की चपेट में आ जाता है। सड़कों पर बेतरतीब ठेले, अतिक्रमण और अव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था के कारण शहर धीरे-धीरे “ठेलों का शहर” बनता जा रहा है। इस गंभीर स्थिति को लेकर उदयपुर सिटीजन सोसायटी की ओर से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, होटल उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
बैठक में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि यदि आने वाले 5 से 10 वर्षों के लिए मास्टर प्लानिंग के तहत सड़क विस्तार, फ्लाईओवर निर्माण और अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक प्रबंधन मानकों के अनुरूप कार्य नहीं किया गया, तो शहर की स्थिति और भी बदतर हो जाएगी।
सोसायटी के अध्यक्ष क्षितिज कुम्भट ने कहा कि उदयपुर को इंदौर, कोटा और गिफ्ट सिटी जैसे शहरों से सीख लेने की आवश्यकता है, जहां आधुनिक और सुव्यवस्थित सड़क ढांचा विकसित किया गया है। कुम्भट ने ऑटो रिक्शा में मीटर सिस्टम, ड्रेस कोड और अनिवार्य पहचान पत्र लागू करने की मांग उठाई, ताकि मनमानी वसूली पर रोक लग सके। उन्होंने महिला पुलिस के लिए शहर के प्रमुख क्षेत्रों में वूमन बाइक स्क्वॉड शुरू करने, सस्ती बस सेवाएं बढ़ाने तथा बड़े ऑटो हटाकर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की सिफारिश की। साथ ही चित्तौड़गढ़, राजसमंद, नाथद्वारा, कुंभलगढ़ और उदयपुर को जोड़ने वाली मेट्रो रेल सेवा की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे पर्यटक अधिक समय तक इस क्षेत्र में ठहर सकें और आसपास के पर्यटन स्थलों का भी विकास हो सके।
बैठक में होटल एसोसिएशन से जुड़े अर्जुन सिंह (लेक पिछोला), समर विजय (उदय कोठी), जयवर्धन (आमेट हवेली ), दिव्यऋषि राणावत (कांकरिया) और यशवर्धन राणावत( जिवाना हवेली) ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। प्रमुख सुझावों में शहर में पिंक और ब्लू ई-रिक्शा को बढ़ावा देना, संकरी सड़कों पर बड़े ऑटो का प्रवेश प्रतिबंधित करना तथा प्रदूषण कम करने के लिए ई-व्हीकल्स को प्रोत्साहित करना शामिल रहा।
पीक टाइम में शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक लालघाट, चांदपोल और सहेलियों की बाड़ी जैसे क्षेत्रों में वन-वे सिस्टम लागू करने, स्पष्ट साइन बोर्ड लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मोबाइल ऐप के माध्यम से तत्काल चालान काटने की मांग की गई। साथ ही शहर के अंदरूनी प्रवेश बिंदुओं और प्रमुख पोल क्षेत्रों में 24 घंटे ट्रैफिक पुलिस की तैनाती का सुझाव दिया गया। बैठक में बताया गया कि शहर को कम से कम 400 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है, जबकि वर्तमान में केवल 120 ही उपलब्ध हैं। यशवर्धन राणावत ने लाइसेंसधारी टूरिस्ट गाइड्स को टूरिस्ट पुलिस में शामिल करने का सुझाव दिया, जिससे पर्यटकों को सही मार्गदर्शन, सुरक्षा और त्वरित सहायता मिल सके।
जयवर्धन (आमेट हवेली) ने कहा कि पिछोला झील, जो उदयपुर की पहचान और पर्यटन की जान है, वहां तक पहुंचना यदि मुश्किल हो गया तो पर्यटन और व्यापार दोनों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पर्यटक उदयपुर आना बंद कर देंगे। वर्तमान में भी कई टूर ऑपरेटर्स ने पीक सीजन में उदयपुर को अपने टूर पैकेज से हटाना शुरू कर दिया है, क्योंकि पर्यटक घंटों ट्रैफिक जाम में फंसे रहते हैं और अन्य शहरों की ओर रुख कर रहे हैं।
बैठक में सीसारमा और स्वरूप सागर क्षेत्र से पिछोला झील तक बैटरी या सोलर से चलने वाली कम शुल्क वाली फेरी बोट सेवा शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिससे होटल और रेस्टोरेंट्स में आने-जाने वाले पर्यटकों का दबाव सड़कों से हटाया जा सके। इस प्रस्ताव पर होटल व्यवसायियों ने सहयोग का आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त लालघाट और चांदपोल जैसे क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने, सड़क किनारे पार्किंग समाप्त कर व्यवस्थित पार्किंग लॉट विकसित करने तथा आपात स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।