जयपुर, 20 फ़रवरी । शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार शिक्षा विभाग के सभी रिक्त पदों को भरने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा द्वारा पांच वर्षों में चार लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसमें करीब एक लाख 75 हजार पद शिक्षक एवं अन्य कर्मचारियों के होंगे।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक थावर चन्द के पूरक प्रश्नों के उत्तर में मंत्री ने बताया कि वर्तमान सरकार अब तक 72 हजार पद भर चुकी है। इनमें कुछ पद पदोन्नति से तथा कुछ नई भर्ती के माध्यम से भरे गए हैं। वर्ष 2024 में 2,202 पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसकी परीक्षा पूरी हो चुकी है और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। वर्ष 2025 में 3,225 पदों की नई भर्ती निकाली गई है, जिन पर चयनित अभ्यर्थी शीघ्र सेवाएं देंगे।
उन्होंने बताया कि वरिष्ठ अध्यापक भर्ती के अंतर्गत वर्ष 2024 में 2,129 पद तथा वर्ष 2025 में 6,500 पदों की भर्ती निकाली गई है, जो वर्तमान में प्रक्रियाधीन है। मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने 6,264 विद्यालयों का क्रमोन्नयन तो किया, लेकिन एक भी पद सृजित नहीं किया। इसी प्रकार महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खोले गए, परंतु उनके लिए शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई।
मंत्री ने कहा कि सरकार एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्ग के हितों के प्रति संवेदनशील है। यदि किसी प्रकार के बैकलॉग पद शेष हैं तो उन्हें आगामी भर्तियों में समायोजित कर भरने का प्रयास किया जाएगा।
मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा मंत्री ने प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के श्रेणीवार एवं विषयवार रिक्त पदों की जानकारी सदन में प्रस्तुत की।
उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा में प्राध्यापक एवं वरिष्ठ अध्यापक के 50 प्रतिशत पद पदोन्नति तथा 50 प्रतिशत सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। वहीं प्रारंभिक शिक्षा में अध्यापक लेवल प्रथम एवं द्वितीय के 100 प्रतिशत पद प्रचलित सेवा नियमों के अंतर्गत सीधी भर्ती से भरे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि पदोन्नति के रिक्त पदों को भरने के लिए पदोन्नति कैलेंडर जारी कर समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित की गई है। साथ ही भर्ती एजेंसियों के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की कार्यवाही भी जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश में कोई भी पद रिक्त न रहे और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो।