वैध अनुमति लेकर चौहारे पर मूर्ति की स्थापना पर एतराज नहीं, लेकिन यातायात नहीं हो प्रभावित

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जयपुर, 12 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने नीम का थाना में रामलीला मैदान के पास चौराहे पर प्रतिमा स्थापित करने से जुडे मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। अदालत ने कहा कि चौहारे पर प्रतिमा की स्थापना वैध अनुमति लेकर की गई है तो इस पर कोई एतराज नहीं किया जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उस जगह का उपयोग कार्यक्रम आयोजित करने के लिए किया जाए। चौराहा अपने मूल स्वरूप में बना रहना चाहिए और आसपास का यातायात भी प्रभावित नहीं होना चाहिए। अदालत ने कहा कि जो लोग प्रतिमा में आस्था रखते हैं वे यहां माला चढा सकते हैं, लेकिन यहां कोई कार्यक्रम आयोजित करने और यातायात में रुकावट डालने के लिए जगह पर कब्जा नहीं करेंगे। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश आस्था जन कल्याण समिति व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।

जनहित याचिका में अधिवक्ता विकास कुमार ने कहा कि कुछ लोगों ने मौके पर रातों रात चबूतरा बनाकर महाराजा अग्रसेन की प्रतिमा स्थापित कर दी। वहीं यहां पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां होने से इलाके के व्यस्त मार्ग पर रोजाना यातायात प्रभावित होता है। इस पर अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार संभागीय आयुक्त ने गत 30 जनवरी को कुछ पाबंदियों के साथ यहां प्रतिमा स्थापना की अनुमति दी है। ऐसे में प्रतिमा की स्थापना को अवैध नहीं माना जा सकता, लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं है कि इसे धार्मिक उत्सव आयोजित करने की जगह बनाकर यातायात बाधित किया जाए। जिसके साथ ही खंडपीठ ने इस संबंध में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है।