जयपुर, 17 मार्च । अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-18 ने मुहाना मंडी थाना पुलिस से 23 मार्च तक बताने को कहा है कि दो साल पहले मुहाना मंडी अध्यक्ष की ओर से दर्ज धोखाधड़ी की एफआईआर में अब तक क्या जांच की गई है। अदालत ने यह आदेश परिवादी पप्पू लाल कुम्हार के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए दिए।
प्रार्थना पत्र में अधिवक्ता विकास सोमानी ने अदालत को बताया कि परिवादी मुहाना मंडी में फल व सब्जी का व्यापारी है और फल सब्जी संयुक्त व्यापार संघ का अध्यक्ष है। परिवादी के पास अप्रैल, 2017 में चौरडिया ग्रुप के मालिक विनय चौरडिया और अरिहंत एंटरप्राईजेज के अधिकृत प्रतिनिधि मनीष भंडारी और अरिहंत भंडारी आए और उनकी आवासीय योजना घर आंगन में फ्लैट बेचने में सहयोग मांगा और बुकिंग पर पांच फीसदी लाभांश देने का वादा किया। इसके बाद उन्होंने परिवादी के नाम से योजना के पंफलैट बंटवाए। इस दौरान करीब 132 लोगों ने परिवादी के जरिए योजना में बुकिंग कराई। वहीं बुकिंग कराने वालों को ऊंची दरों पर होम लोन दिलवाकर राशि अरिहंत एंटरप्राइजेज ने प्राप्त कर ली। जिसके ब्याज की किस्त बुकिंग कराने वाले जमा करा रहे हैं, जबकि उन्हें कहा गया था कि किस्त पजेशन के बाद शुरू होगी। इसके अलावा रजिस्ट्री के नाम पर 25 हजार रुपए भी अलग से लिए गए। इसके बावजूद मौके पर निर्माण नहीं कराया गया और विकासकर्ताओं ने परिवादी से लिए सिक्योरिटी चेक भी नहीं लौटाए। इस संबंध में परिवादी की ओर से मुहाना थाने में 30 मार्च, 2024 को विनय चौरडिया, मनीष भंडारी और अरिहंत भंडारी के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन दो साल बीतने के बाद अभी तक जांच अधिकारी ने परिवादी के बयान तक दर्ज नहीं किया, जबकि वह जांच अधिकारी से कई बार मिलकर मामले में जांच करने की गुहार कर चुका है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने मुहाना मंडी थाना पुलिस से पूछा है कि मामले में दर्ज एफआईआर में अब तक क्या जांच की गई है।