कार्यकारी निदेशक को दें कानूनी सिद्धांत और प्रक्रिया का प्रशिक्षण, तब तक नहीं सौंपे मानव संसाधन प्रबंधन का काम- हाईकोर्ट

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जयपुर, 01 अप्रैल । राजस्थान हाईकोर्ट ने रोडवेज कर्मचारी के निलंबन से जुडे मामले में अहम टिप्पणी करते हुए प्रमुख कार्मिक सचिव को निर्देश दिए हैं कि आरएसआरटीसी के कार्यकारी निदेशक ट्रेफिक के पद पर कार्यरत ज्योति चौहान को प्रक्रिया और कानूनी सिद्धांत का प्रशिक्षण दिया जाए। अदालत ने कहा कि जब तक यह प्रशिक्षण नहीं हो जाता तब तक वे मानव संसाधन के मैनेजमेंट से जुडे किसी भी काम की जिम्मेदारी नहीं निभाए। इसके साथ ही अदालत ने मामले में निलंबित कर्मचारी की ओर से पेश अभ्यावेदन पर कार्यकारी निदेशक की ओर से गत 16 जनवरी को दिए आदेश को निरस्त करते हुए उस पर पुन: निर्णय के लिए आरएसआरटीसी के प्रबंध निदेशक को भेजा है।

जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश प्रदीप गुप्ता की ओर से दायर याचिका का निस्तारण करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि कई बार अदालत की ओर से यह कहा जा चुका है कि जब भी कोई निर्णय किसी पक्ष को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है तो निर्णय लेने वाले प्राधिकारी का कर्तव्य है कि वह संबंधित अभ्यावेदन को अस्वीकार करने का कारण बताए। अदालत ने कहा कि पूर्व में दायर याचिका को तय करते हुए अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक निर्णयों का हवाला दिया था, लेकिन इन मामलों मे तय कानूनी प्रावधानों पर विचार किए बिना अभ्यावेदन का निपटारा किया गया, जो रोडवेज की विधिक सोच को दर्शाता है।

याचिका में अधिवक्ता संजय जोशी ने अदालत को बताया की याचिकाकर्ता रोडवेज में परिचालक पद पर कार्यरत है। उसे रोडवेज की ओर से निलंबन करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर अदालत ने याचिकाकर्ता को इस संबंध में अपना अभ्यावेदन संबंधित अधिकारी के समक्ष पेश करने को कहा था। याचिका में कहा गया कि आरएसआरटीसी के कार्यकारी निदेशक ट्रेफिक ने गत 16 जनवरी को उसका अभ्यावेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उसका निलंबन उचित है। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि किसी भी कर्मचारी को निलंबन करने के समय उसे आरोप पत्र और लिखित आदेश दिया जाता है, लेकिन याचिकाकर्ता को न तो लिखित आदेश दिया गया और ना ही उसे निलंबित करते समय आरोप पत्र मिला। वहीं अदालत की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के आधार पर याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन तय करने को कहा था, लेकिन रोडवेज ने बिना आधार बताए उसे खारिज कर दिया।