हिसार : साहित्य का मूल आधार अभी भी अपूरणीय मानवीय अनुभव : प्रो. उमेद सिंह

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डिजिटल प्रगति के बीच विकसित होते संबंधों पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता प्रोफेसर उमेद सिंह ने शनिवार काे साहित्यिक

परंपरा और तकनीकी नवाचार के जटिल मेल का विश्लेषण करते हुए कहा कि हालांकि तकनीक ने

डिजिटल अभिलेखागार से लेकर एआई-जनित कहानियों तक कहानी कहने के नए माध्यम प्रदान किए

हैं, लेकिन साहित्य का मूल आधार अभी भी अपूरणीय मानवीय अनुभव ही है। उन्होंने विद्यार्थियों

व संकाय सदस्यों को ‘हाई-टेक’ उपकरणों के साथ ‘हाई-टच’ मानवीय मूल्यों के संतुलित एकीकरण के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय सभागार में

हुआ साथ हुआ, जिसके पश्चात विश्वविद्यालय कुलगीत के गायन के बाद डॉ. मनदीप कौर ने औपचारिक

रूप से सभी का स्वागत किया। इस अवसर पर विभाग की डॉ. साक्षी जैन, डॉ. तमन्ना,

डॉ. आस्था सहित अन्य शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन विभागाध्यक्ष

डॉ. प्रियंका सिंगला द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव और प्रोफेसर उमेद सिंह को स्मृति चिन्ह

भेंट करने के साथ हुआ, जिसके बाद राष्ट्रगान के साथ इस गरिमामय आयोजन का समापन किया

गया।