सूरजपुर, 14 अप्रैल । “टीबी हारेगा, सूरजपुर जीतेगा” अब केवल नारा नहीं, बल्कि जिले का जनआंदोलन बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने 100 दिवसीय गहन टीबी उन्मूलन अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत कर निर्णायक कदम उठाया है। विश्व टीबी दिवस (24 मार्च) से शुरू हुआ यह चरण पहले चरण की सफलता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
कलेक्टर एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की टीम अब उन इलाकों तक पहुंच रही है, जहां टीबी का खतरा सबसे अधिक है। खदान प्रभावित क्षेत्र, झुग्गी बस्तियां, सुदूर जनजातीय गांव, प्रवासी मजदूरों के ठिकाने और छात्रावास—इन सभी हाई-रिस्क क्षेत्रों में घर-घर स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। माइक्रो प्लान के जरिए हर संदिग्ध व्यक्ति तक पहुंच सुनिश्चित की जा रही है, वहीं ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अभियान में जोड़ा गया है।
अभियान के दूसरे चरण में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें दूरस्थ गांवों तक पहुंच रही हैं, जबकि जिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों में मॉलिक्यूलर टेस्टिंग के जरिए त्वरित और सटीक जांच की जा रही है। “जहां मशीन, वहीं जांच” की रणनीति से समय पर पहचान और उपचार संभव हो रहा है।
टीबी के खिलाफ जंग में पोषण को अहम मानते हुए निश्चय पोषण योजना के तहत प्रत्येक मरीज को उपचार अवधि में 6 हजार रुपये तक की सहायता सीधे खाते में दी जा रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज दवा के साथ पर्याप्त पोषण भी प्राप्त कर सके।
इस अभियान की खास बात सामाजिक सहभागिता है। जिले में निश्चय मित्रों की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। विभिन्न संस्थाओं और औद्योगिक इकाइयों के सहयोग से सैकड़ों मरीजों को अतिरिक्त पोषण सहायता मिल रही है। साथ ही कई सामाजिक संस्थाएं और युवा स्वयंसेवक मरीजों को गोद लेकर उनकी देखभाल कर रहे हैं। यह पहल बताती है कि सूरजपुर में टीबी के खिलाफ लड़ाई अब जन-जन की मुहिम बन चुकी है।
अभियान के पहले चरण में 1.84 लाख संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान की गई। 30 हजार से अधिक लोगों की एक्स-रे स्क्रीनिंग और हजारों मॉलिक्यूलर टेस्ट के माध्यम से 627 नए मरीज चिन्हांकित कर उनका तत्काल उपचार शुरू किया गया। यह आंकड़े अभियान की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी को दो सप्ताह से अधिक समय से खांसी, लगातार बुखार या बिना कारण वजन कम होने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। जांच और उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है। लापरवाही न करें, टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है, बस समय पर इलाज जरूरी है।