जगदलपुर, 16 अप्रैल । बस्तर जिले के कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में जिले में खरीफ वर्ष 2026 के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विभाग ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के शोध के आधार पर किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग की अपील की है, जिसके तहत नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। नैनो यूरिया का निर्धारित दर पर दो बार छिड़काव करने से नत्रजन उर्वरक की खपत में 25 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है, वहीं नैनो डीएपी के माध्यम से बीजोपचार और छिड़काव करने पर फास्फोरस की मात्रा में भी 25 प्रतिशत की बचत संभव है। इस तकनीकी जानकारी के प्रचार-प्रसार हेतु जिला प्रशासन द्वारा सहकारी समितियों और निजी केंद्रों पर पोस्टर और फ्लेक्सी भी चस्पा किए गए हैं।
खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिले हेतु कुल 46,050 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरक का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से वर्तमान में 25,775 मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है। वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने हेतु भूमि आधारित नवीन सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत भविष्य में केवल फार्मर आईडी के माध्यम से ही खाद का वितरण किया जाएगा। इसी क्रम में किसानों से अपील की गई है कि वे सीएससी या लैम्पस के माध्यम से अपना पंजीयन तत्काल पूर्ण करा लें। इसके अतिरिक्त विभाग नत्रजन की पूर्ति के लिए हरी खाद और नील हरित काई के उपयोग पर भी विशेष बल दे रहा है, जिसके लिए बीज निगम कोकामुण्डा में उत्पादन की आवश्यक तैयारी पूर्ण कर ली गई है।
किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए जिले का उड़नदस्ता दल लगातार केंद्रों का निरीक्षण कर रहा है ताकि उन्हें गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान सामग्री प्राप्त हो सके। प्रशासन ने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए हैं कि खाद के साथ नैनो यूरिया, सूक्ष्म पोषक तत्व या कीटनाशक जैसी अन्य सामग्री लेने के लिए किसानों पर किसी भी प्रकार का दबाव न बनाया जाए। यदि कोई विक्रेता किसानों को जबरन सामग्री क्रय करने हेतु बाध्य करता है, तो उसके विरुद्ध उर्वरक गुण नियंत्रण अधिनियम 1985 के तहत कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।