छोटेडोंगर में धर्मांतरित लोगों को सर्व आदिवासी समाज ने ‘घर वापसी’ का दिया अल्टीमेटम

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जगदलपुर, 19 अप्रैल । जिले के संवेदनशील क्षेत्र छोटेडोंगर में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर गंभीर रूप लेता जा रहा है। हाल के दिनों में बढ़ते स्थानीय तनाव के बीच ‘सर्व आदिवासी समाज’ और अन्य सामाजिक संगठनों ने इस विषय पर खुलकर विरोध जताया है। समाज ने धर्मांतरित हो चुके लोगों से ‘घर वापसी’ की मांग करते हुए एक निश्चित समय सीमा भी तय कर दी है।

आज रविवार काे छोटेडोंगर मेंहुई इस बैठक के बाद सर्व आदिवासी समाज ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखते हुए धर्मांतरित लोगों को अपनी मूल आस्था में लौटने के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है। समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 30 अप्रैल तक यदि लोग स्वेच्छा से ‘घर वापसी’ नहीं करते हैं, तो वे आगे कड़ा रुख अपनाने के लिए बाध्य होंगे। समाज ने यह भी दोहराया कि उनका उद्देश्य अपनी पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक मूल्यों की रक्षा करना है।

छोटेडोंगर और आसपास के अबुझमाड़ क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन के सामने यह मामला एक बड़ी चुनौती के रूप में उभरा है। किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से रोकने के लिए स्थानीय पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है, ताकि किसी भी संभावित अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। यह मुद्दा केवल छोटेडोंगर तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ के अन्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भी समय-समय पर सामने आता रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता का सवाल भी बना हुआ है। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस संवेदनशील स्थिति को किस तरह संभालता है और क्या 30 अप्रैल तक कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल पाता है?