सज्जन निवास बाग का इतिहास उदयपुर की सांस्कृतिक यात्रा का जीवंत दस्तावेज — डॉ. पुरोहित

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उदयपुर, 21 अप्रैल । उदयपुर के 475वें स्थापना दिवस समारोह के तहत आयोजित संगोष्ठी में मुख्य वक्ता इतिहासविद डॉ. राजेन्द्र नाथ पुरोहित ने कहा कि सज्जन निवास बाग (गुलाब बाग) का 1882 से 1920 तक का विकास उदयपुर की सांस्कृतिक और स्थापत्य विरासत की महत्वपूर्ण कहानी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ झीलों के आसपास हुए निर्माण कार्यों से पर्यावरणीय चुनौतियां भी बढ़ीं, जिन पर आज गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ और लोकजन सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में “उदयपुर की संस्कृति एवं विरासत” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में पुरोहित ने बताया कि उस दौर में उदयपुर में हुए विभिन्न निर्माण कार्यों ने शहर की सांस्कृतिक और स्थापत्य पहचान को समृद्ध किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जगत सिंह द्वितीय के बाद झीलों के आसपास निर्माण गतिविधियां बढ़ने से धीरे-धीरे झीलों में प्रदूषण की समस्या भी प्रारंभ हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने की, जबकि मुख्य अतिथि कुलाधिपति बी.एल. गुर्जर थे। विशिष्ट अतिथि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. उमाशंकर शर्मा थे। कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती की प्रतिमा और महाराणा उदय सिंह के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। इसके बाद अध्यक्ष विमल शर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया।

मुख्य अतिथि गुर्जर ने कहा कि उदयपुर का पिछोली गांव से विकसित होकर आज के स्वरूप तक पहुंचना आम जनता के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शहर की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी समाज के हर व्यक्ति की है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति सारंगदेवोत ने कहा कि प्रकृति, संस्कृति और विरासत को संरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। मेवाड़ की परंपरा, सद्भावना और सामाजिक आचरण जैसी अमूर्त विशेषताएं इसे विशिष्ट बनाती हैं, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।

संगोष्ठी में प्रो. जीवन सिंह खरकवाल, डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू, जी.पी. सोनी और जयकिशन चौबे सहित कई वक्ताओं ने उदयपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. कुलशेखर व्यास ने किया तथा अंत में जयराज आचार्य ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।