नैनीताल, 26 अप्रैल । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गत दिनों संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित संविधान संशोधन के गिर जाने के बावजूद जल्द ही महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण आरक्षण मिलने का विश्वास जताया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा को पहल कर इस संबंध में विधेयक पारित करना चाहिए। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार भी जल्द ही एक बार पुनः विपक्ष को विश्वास में लेकर इस संबंध में पहल कर सकती है। उन्होंने संसद में उत्तराखंड में परिसीमन को लेकर भी बात रखे जाने की जरूरत जतायी है।
रविवार को राज्य अतिथि गृह नैनीताल क्लब में पत्रकार करते हुए श्री रावत ने यह बात कही। इसके अतिरिक्त उन्होंने उत्तराखंड में ‘आग-बाघ और जाम’ का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार में वनों में आर्द्रता बनाने के लिये चाल, खाल बनाने और चीड़ को फैलने से रोकने के अनेक कार्य किये थे। लेकिन उसके बाद पिछले 9 वर्षों में इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुए। जिस कारण अप्रैल माह में ही जंगलों में आग लगने की अनेक घटनाएं हो रही हैं और इसी कारण बाघ व अन्य हिंसक वन्य जीव भी मानव बस्तियों का रुख कर रहे हैं और घातक साबित हो रहे हैं।
वहीं जाम पर कहा कि एक ओर सरकार जाम यानी शराब को हर किसी के लिए उपलब्ध करा रही है, वहीं पिछले एक दशक में वाहनों की बढ़ती संख्या के अनुसार पार्किंग व बाइपास निर्माण सहित जाम को कम करने के प्रयास नहीं किये गये हैं। उन्होंने अपनी पार्टी की ओर से भी इस संबंध में अपना दृष्टिकोण-योजना लाने पर बल दिया। उन्होंने दावा किया कि अंतिम बाइपास उनकी सरकार ने देहरादून में बनाया था, उसके बाद से राज्य सरकार ने कहीं बाइपास नहीं बनाया है।
उन्होंने अल्मोड़ा के सांसद अजय भट्ट के केंद्रीय सड़क परिवहन राज्य मंत्री होने के बावजूद क्वारब की समस्या का समाधान न कर पाने का भी जिक्र किया। उन्होंने राज्य सरकार के पास शहरीकरण के लिये भी कोई नीति न होने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने 32 काउंटर मैग्नेटिक टाउनशिप बनाने की योजना बनायी थी। कहा कि सरकार को शहरों में एल्युमिनियम के जैसे हल्के घर बनाने की पहल करनी चाहिए।