नई दिल्ली, 01 मई । दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के अवसर पर शुक्रवार को धीरपुर स्थित संत निरंकारी मंडल में आयोजित श्रमिक सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं। उन्होंने यहां पूर्व शिक्षा की मान्यता (आरपीएल) योजना के तहत एक व्यापक कौशल विकास कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस पहल के तहत हर साल लगभग 35,000 श्रमिकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें प्रत्येक बैच में कम से कम 20 श्रमिक शामिल होंगे। शुरुआती चरण में 5 बैच चलाए जा रहे हैं, जिनमें हर बैच में 100 श्रमिक भाग ले रहे हैं। ये प्रशिक्षण विभिन्न एजेंसियों के माध्यम से जिला स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। इस योजना के तहत असिस्टेंट मेसन, बार बेंडर, इलेक्ट्रीशियन, कंस्ट्रक्शन पेंटर एवं डेकोरेटर और शटरिंग कारपेंटर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1000 निर्माण श्रमिकों को सेफ्टी किट वितरित कीं। इन किट्स में हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स, मास्क, रिफ्लेक्टिव जैकेट और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरण शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने निर्माण श्रमिकों के 100 बच्चों को शिक्षा किट भी दीं। इन किट्स में स्कूल बैग, किताबें, स्टेशनरी, शैक्षणिक सामग्री और जरूरी शिक्षण उपकरण शामिल हैं। ये सभी बच्चे पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के आश्रित हैं और विभिन्न सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महिला श्रमिकों के साथ सीधा संवाद कर उनके जमीनी अनुभवों और चुनौतियों को जाना। कार्यक्रम में दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा, वरिष्ठ अधिकारी, प्रशिक्षण एजेंसियों के प्रतिनिधि और हजारों की संख्या में निर्माण श्रमिक उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली का हर विकास कार्य श्रमिकों के अथक परिश्रम और समर्पण का परिणाम है। श्रमिक केवल श्रम नहीं करते बल्कि देश और समाज की प्रगति की नींव रखते हैं। सरकार की जिम्मेदारी केवल श्रमिकों के काम का उपयोग करना नहीं बल्कि उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाना, उन्हें सुरक्षा देना और उनके परिवारों को अवसर प्रदान करना भी है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में श्रमिक कल्याण के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ई-श्रम पोर्टल और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं ने करोड़ों श्रमिकों को लाभ पहुंचाया है। दिल्ली सरकार भी इसी दिशा में कार्य करते हुए सिंगल विंडो पोर्टल, लेबर चौकों पर पंजीकरण, अधिक न्यूनतम वेतन, 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने वाली अटल कैंटीन, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और मोबाइल स्वास्थ्य सेवाओं जैसी सुविधाएं प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के लिए कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य श्रमिकों पर आर्थिक बोझ कम करना और उन्हें अधिक से अधिक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ना है। इसी के तहत दिल्ली के पंजीकृत भवन एवं निर्माण श्रमिकों के लिए पंजीकरण शुल्क 20 रुपये और नवीनीकरण शुल्क 5 रुपये को पूरी तरह माफ कर दिया गया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने ‘सामूहिक विवाह योजना’ शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र जोड़े को आर्थिक सहायता दी जाएगी। विवाह समारोह के लिए टेंट, भोजन और अन्य सभी जरूरी व्यवस्थाओं का खर्च सरकार उठाएगी।
उन्होंने बताया कि श्रमिकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए आधुनिक लेबर चौक और ‘श्रमिक सेवा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के जरिए मोबाइल वैन सीधे श्रमिकों तक सेवाएं पहुंचाएंगी। इन केंद्रों पर पीने का पानी, बैठने की व्यवस्था, शौचालय, प्राथमिक उपचार, रोजगार के अवसर, कौशल विकास और शिकायत निवारण जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे श्रमिकों को लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा और सेवाएं अधिक पारदर्शी व आसान बनेंगी।
इस अवसर पर श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि श्रमिक दिवस और बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर श्रम, सेवा और सम्मान का प्रतीक है। दुनियाभर में यह दिन श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। दिल्ली ने वर्षों बाद ऐसी मुख्यमंत्री देखी है, जो सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच कर उनके साथ खड़ी हैं। यह श्रमिकों के लिए नए विश्वास और नई शुरुआत का संकेत है।