चंबल में अवैध रेत खनन पर सख्ती : उच्चतम न्यायालय के दल ने चम्बल नदी पर किया निरीक्षण

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मुरैना, 01 मई । मप्र के मुरैना अंचल में चंबल नदी क्षेत्र के वन्य जीव संरक्षण के लिए रेत उत्खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद बड़े पैमाने पर अवैध खनन जारी है, जिसे लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त नाराजगी के बाद केंद्रीय सशक्त समिति (सीईसी) की टीम निरीक्षण के लिए शुक्रवार को मौके पर पहुंची।

उल्‍लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय के दल ने चंबल नदी की तलहटी में रेत के अवैध उत्खनन का गहन निरीक्षण किया । इस अवसर पर मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश व राजस्थान के प्रशासन, पुलिस व वन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। शुक्रवार को चंबल नदी के राजघाट पर रेतघाट से दोनों और मोटर वोट से जाकर अवलोकन किया।

उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्मित की गई सीईसी कमेटी के सदस्य चंद्रप्रकाश गोयल अपने साथियों के साथ मुरैना पहुंचे। सभी ने संयुक्त रूप से चंबल नदी का भ्रमण किया। रेत का खनन व परिवहन को रोकने के लिए अधिकारियों से चर्चा भी की।

चंबल नदी के रेतघाट का अवलोकन करने के पश्चात तीनों राज्यों के समीक्षा बैठक देवरी घड़‍ियाल अभ्यारण केंद्र पर हुई। यह बैठक लगभग दो घंटे तक चली। इसमें शामिल होने के लिए मध्य प्रदेश राज्य वन विभाग के बल प्रमुख सहित स्थानीय प्रशासन पुलिस व वन अधिकारी भी शामिल हुए। कुछ दिन पूर्व वनरक्षक को अवैध रेत परिवहन करने वाले चालक ने कुचल दिया था। इस मामले को मीडिया के माध्यम से उच्चतम न्यायालय द्वारा संज्ञान में लेकर रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन रोकने के लिए प्रदेश सरकार को निर्देशित किया गयाा था। मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण से अवैध खनन व उसके परिवहन को रोकने की सुनवाई के लिए 11 मई निर्धारित की है, हालांकि इसके बाद से चंबल नदी की तलहटी में सशस्त्र बल तैनात कर दिया गया है।

उच्चतम न्यायालय राष्ट्रीय चंबल घाटी वाला अभ्यारण से रेट का खनन व परिवहन रोकने के स्थाई प्रयासों पर विचार कर रहा है । इसके लिए बनाई गई कमेटी द्वारा आज चंबल नदी का भ्रमण कर अधिकारियों से गहन चर्चा की है। इसकी रिपोर्ट 11 मई पूर्व उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी, जिस पर आगामी कार्रवाई के लिए न्यायमूर्ति द्वारा सरकार को निर्देशित किया जाएगा, हालांकि जिले के वन विभाग मुखिया चंबल नदी घाट से रेत का अवैध खनन पूरी तरह बंद बता रहे हैं लेकिन खनन के बाद परिवहन कर रहे वाहनों को देखकर यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि बीहड़ में कहीं रेत का एकत्रीकरण किया गया है, जिसे नष्ट करने का काम किया जाएगा।