जयपुर, 14 मई । पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने गुरुवार को पत्रकारिता की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पत्रकारिता अंधेरे में टॉर्च का काम करती है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी ताकत सत्य और निष्पक्षता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का हृदय है और इसकी जिम्मेदारी केवल खबर देने की नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने की भी है।
राजे जयपुर में आयोजित मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर उन्होंने मीडिया जगत को संदेश देते हुए कहा कि टीआरपी की प्रतिस्पर्धा में छोटी बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करना पत्रकारिता के मूल्यों के खिलाफ है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि समाचार को समाचार ही रहने देना चाहिए, उसमें व्यक्तिगत विचार या अनावश्यक व्याख्या शामिल नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने पत्रकारों को सलाह दी कि किसी वक्तव्य को उसके सही संदर्भ में समझकर ही प्रकाशित किया जाए। यदि किसी विषय पर भ्रम हो तो संबंधित व्यक्ति से पुष्टि करना बेहतर है, लेकिन ब्रेकिंग न्यूज़ की होड़ में अर्थ का अनर्थ करना उचित नहीं।
उन्होंने प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि “खींचो न कमानों को, न तलवार निकालो, जब तोप मुकाबिल हो, तो अखबार निकालो” लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि पत्रकारिता इस स्तर तक नहीं पहुंचनी चाहिए कि “बन के एक हादसा बाजार में आ जाएगा, जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा।”
राजे ने कहा कि निष्पक्ष, जिम्मेदार और तथ्यपरक पत्रकारिता ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है। मीडिया को सनसनी से अधिक सत्य को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि समाज में विश्वास बना रहे।
समारोह के दौरान मनोज माथुर जर्नलिज्म अवार्ड से विभिन्न पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इनमें भास्कर रिपोर्टर अर्पित शर्मा, आजतक के रिपोर्टर देवांकुर वाधवान, भास्कर डिजिटल के सौरभ अवस्थी, इंडिया टुडे के फोटो पत्रकार पुरुषोत्तम दिवाकर को उनके उत्कृष्ट पत्रकारिता योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में फाउंडेशन की अध्यक्ष सुलक्षणा माथुर, वरिष्ठ पत्रकार अमित भट्ट, आशीष दत्ता तथा भाजपा नेता नीरज जैन ने भी अपने विचार रखे। समारोह में वसुंधरा राजे ने मीडिया जगत को सत्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करने का संदेश दिया।