चंडीगढ़, 18 मई । नायब सरकार ने राज्य की अवैध औद्योगिक कॉलोनियों और अनधिकृत फैक्ट्रियों को कानूनी दायरे में लाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में साेमवार काे हुई कैबिनेट बैठक में ‘हरियाणा मैनेजमेंट ऑफ सिविक अमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट एरिया आउटसाइड म्यूनिसिपल एरिया (स्पेशल प्रोविजंस) संशोधन अधिनियम-2025’ के तहत अहम संशोधनों को मंजूरी दी गई। इससे हजारों औद्योगिक इकाइयों को नियमित होने का अवसर मिलेगा और सड़क, पानी, सीवर, स्ट्रीट लाइट व ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अब इन क्षेत्रों को नियमित कर सड़क, पानी, सीवर, स्ट्रीट लाइट, ड्रेनेज और अन्य आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को संगठित और योजनाबद्ध ढंग से विकसित किया जा सकेगा।
कैबिनेट को बताया गया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में एक विशेष कानून लागू किया था, जिसका उद्देश्य नगर निकाय सीमाओं से बाहर बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था। इसके तहत 19 जुलाई, 2022 को नीति जारी की गई थी और 6 अप्रैल, 2023 को उसमें कुछ राहत संबंधी निर्देश भी दिए गए थे। लेकिन उस समय यह व्यवस्था केवल रिहायशी क्षेत्रों तक सीमित थी और औद्योगिक कॉलोनियां इसके दायरे में नहीं आती थीं। अब मुख्यमंत्री द्वारा बजट 2025 में की गई घोषणा के बाद सरकार ने यह फैसला लिया कि औद्योगिक क्षेत्रों को भी इसी तरह की राहत दी जाएगी, ताकि वहां काम कर रहे उद्योगों को भी कानूनी और आधारभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके। इसी के तहत अक्टूबर 2025 में कानून में संशोधन किया गया और अब कैबिनेट ने उसकी कार्यान्वयन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी है।
नई नीति के तहत वही औद्योगिक कॉलोनियां पात्र मानी जाएंगी जो कम से कम 10 एकड़ के लगातार क्षेत्र में फैली हों और जिनमें न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयां संचालित हों। इसके अलावा संबंधित निर्माण 3 अक्टूबर 2025 से पहले का होना जरूरी होगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि इससे वर्षों से अनधिकृत रूप से चल रहे छोटे और मध्यम उद्योगों को स्थिरता मिलेगी और वे बैंकिंग, बिजली, पर्यावरण मंजूरी तथा अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगे।
कैबिनेट ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल बनाने को भी मंजूरी दी है। इस पोर्टल के माध्यम से उद्योगपति या उनके अधिकृत प्रतिनिधि आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में औद्योगिक क्षेत्र को इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट इंडस्ट्रियल एरिया घोषित करने और इंडस्ट्रियल इकाइयों को नियमित करने की मांग की जा सकेगी।