सूरजपुर : स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली सुशीला सिंह की जिंदगी, बीसी सखी और डिजिटल सेवा केंद्र से बनीं आत्मनिर्भर

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सूरजपुर, 07 जुलाई । आज मंगलवार को महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। ग्राम छतरंग निवासी सुशीला सिंह ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि बीसी सखी और डिजिटल सेवा केंद्र का संचालन कर आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बनाई।

सुशीला सिंह बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। वे कृषि मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती थीं और सीमित आय के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता था। इसी दौरान उन्हें गांव की महिलाओं से स्व-सहायता समूह की जानकारी मिली। योजनाओं और समूह की कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर उन्होंने शिवा स्व-सहायता समूह की सदस्यता ली।

समूह से जुड़ने के लगभग छह महीने बाद उन्हें कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के तहत ऋण मिला। इसमें से 5 हजार रुपये लेकर उन्होंने बीसी सखी के रूप में काम शुरू किया। आय बढ़ने पर उन्होंने एक लैपटॉप खरीदा और फोटोकॉपी की दुकान शुरू की। बाद में कंप्यूटर, पासबुक प्रिंटर और अन्य उपकरण खरीदकर ऑनलाइन सेवाएं भी शुरू कर दीं, जिससे उनकी आमदनी लगातार बढ़ती गई।

व्यवसाय का विस्तार करने के लिए उन्होंने समूह से 50 हजार रुपये का ऋण लिया। वर्तमान में उनके व्यवसाय में लगभग 1.50 लाख रुपये का निवेश है और अब तक करीब 2.70 लाख रुपये का लाभ प्राप्त हो चुका है। उनकी वार्षिक आय लगभग 1.40 लाख रुपये है, जबकि मासिक आय 15 से 18 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

सुशीला सिंह अब अपनी बेटी को अच्छे विद्यालय में शिक्षा दिला रही हैं और परिवार की जरूरतों को पहले से बेहतर तरीके से पूरा कर रही हैं। उनका कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सकारात्मक बदलाव आया है। बढ़ती आय के साथ वे धीरे-धीरे लिया गया ऋण भी चुका रही हैं।

उन्होंने शासन की महिला सशक्तिकरण और आजीविका योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया। आज उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है और यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर महिलाएं अपने परिवार और समाज की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।