हिसार राेडवेज कार्यशाला में पेड़ कटाई पर सीएम फ्लाइंग की दूसरी रेड, साक्ष्यों से छेड़छाड़ के भी मिले संकेत

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पहले पाई गई थी हाईकोर्ट की रोक के बावजूद पेड़ों की कटाईदूसरी जांच में सरकारी परिसर से कटे पेड़ों की जमीन में से 19 जड़ें व लकड़ी गायब मिलीं, कई नई अनियमितताएं उजागरहिसार, 7 जुलाई । पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा पेड़ों की कटाई पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद हरियाणा रोडवेज हिसार कार्यशाला में बड़े पैमाने पर पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में सीएम फ्लाइंग टीम ने मंगलवार को दूसरी बार छापेमारी कर जांच की। दूसरी जांच के दौरान पहले निरीक्षण में मिले कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मौके से हटाए जाने के तथ्य सामने आए हैं। साथ ही विभागीय रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति में भी गंभीर अंतर पाया गया, जिसे जांच टीम ने गंभीर अनियमितता माना है।सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना ने मामले में कार्रवाई की। इस मौके पर डीएसपी विक्रम भादू, वन विभाग के हिसार के डीएफओ रोहताश, फतेहाबाद के डीएफओ राजेश, एएसआई सुरेंद्र, हेड कांस्टेबल विजय भी मौजूद रहे।सीएम फ्लाइंग हिसार रेंज इंचार्ज सुनैना ने बताया कि 26 जून को गुप्त सूचना के आधार पर सीएम फ्लाइंग ने रोडवेज कार्यशाला में पहली बार छापेमारी की थी। उस दौरान जांच में कार्यशाला परिसर में 86 पेड़ों के कटे हुए ठूंठ (जड़ें) तथा 132 पोल साइज पौधे उखाड़े हुए मिले थे। इसके अलावा कटे हुए पेड़ों की लकड़ी का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था और लकड़ी को खुर्द-बुर्द किए जाने के तथ्य भी सामने आए थे। सुनैना ने बताया कि पहली जांच के दौरान वन विभाग द्वारा जिन कटे हुए पेड़ों की जड़ों की मौके पर नंबरिंग की गई थी, दूसरी जांच में उनमें से लगभग 19 पेड़ों की जड़ें जमीन के अंदर से मौके से गायब मिलीं। परिसर के बाहर रखी गई कटे पेड़ों की जड़ों को भी हटा दिया गया था। वन विभाग के अनुसार सरकारी परिसर में से इस तरह जड़ों का गायब होने गंभीर बात है जबकि परिसर में चारदिवारी भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि पहली जांच के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जांच पूरी होने तक मौके से कोई भी जड़, लकड़ी अथवा अन्य साक्ष्य नहीं हटाए जाएंगे। जांच के दौरान वन विभाग के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां सामने आईं। एक पत्र में विभाग की ओर से 40 से 50 पेड़ काटे जाने का उल्लेख किया गया, जबकि मौके पर इससे कहीं अधिक संख्या में पेड़ कटे होने के साक्ष्य मिले। इसी प्रकार एक अन्य रिकॉर्ड में 128 पेड़ काटे जाने तथा दो पेड़ खड़े होने की जानकारी दी गई थी, लेकिन दूसरी जांच के दौरान मौके पर कोई भी पेड़ खड़ा नहीं मिला। जांच टीम के अनुसार वे दोनों पेड़ भी बिना अनुमति हटाए जा चुके थे। इसके अतिरिक्त विभागीय रिकॉर्ड में केवल 10 सफेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ काटे जाने का उल्लेख था, जबकि मौके पर 55 सफेदा पेड़ों की कटी हुई जड़ें पाई गईं। जांच अधिकारियों ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर माना है।