दिल्ली सचिवालय में पुडुचेरी स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

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नई दिल्ली, 18 अगस्त । दिल्ली सचिवालय में पुडुचेरी स्थापना दिवस के उपलक्ष्य पर दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग द्वारा विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पुडुचेरी स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में दिल्ली के कला, संस्कृति एवं भाषा तथा पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने पुडुचेरी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को नमन करते हुए स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, “भारत की सांस्कृतिक विविधता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। देश के अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की लोक परंपराएं, कला, संगीत और नृत्य हमारी समृद्ध विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं।

उन्होंने कहा कि राजधानी में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को मंच प्रदान किया जाए। ऐसे आयोजन लोगों को भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक संवाद को भी मजबूत करते हैं। कार्यक्रम में 20 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया और पुडुचेरी की लोक एवं जनजातीय संस्कृति पर आधारित विभिन्न मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। कलाकारों ने सौरा जनजातीय नृत्य, जनजातीय लोकनृत्य, कुम्मी तथा ओयिलाट्टम शैली की प्रस्तुतियों के माध्यम से पुडुचेरी की जीवनशैली, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया।

सौरा जनजातीय नृत्य के माध्यम से पुडुचेरी के जनजातीय समुदाय के दैनिक जीवन और प्रकृति के साथ उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाया गया। प्रस्तुति में दिखाया गया कि सुबह की शुरुआत के साथ समुदाय के लोग अपने-अपने दैनिक कार्यों में जुट जाते हैं। कोई लकड़ी की टोकरी बनाने का कार्य करता है, तो कोई पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराता है। लोकगीतों, खुशी और सामूहिक नृत्य के साथ दिन की शुरुआत करने की यह परंपरा जनजातीय जीवन की सहजता, सकारात्मकता और सामुदायिक भावना को दर्शाती है।

कार्यक्रम में पुडुचेरी के प्रसिद्ध मनाकुला विनायगर मंदिर से जुड़ी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को भी नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से दर्शाया गया। भगवान गणेश को समर्पित यह मंदिर पुडुचेरी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। सांस्कृतिक प्रस्तुति के माध्यम से मंदिर की आस्था और पुडुचेरी की धार्मिक विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की गई।

इसके साथ ही कुम्मी और ओयिलाट्टम जैसी तमिल लोकनृत्य परंपराओं की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। कुम्मी में कलाकार तालबद्ध हाथों की मुद्राओं और तालियों के साथ सामूहिक रूप से नृत्य करते हैं, जबकि ओयिलाट्टम में तालबद्ध कदमों और हाथों की मुद्राओं के साथ समूह नृत्य प्रस्तुत किया जाता है। इन प्रस्तुतियों ने पुडुचेरी की लोक संस्कृति की जीवंतता और विविधता को दर्शाया।

कपिल मिश्रा ने कहा कि पुडुचेरी की समृद्ध लोक परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत भारत की विविधता को और समृद्ध करती हैं। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।” उन्होंने पुडुचेरी के सभी नागरिकों को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश की निरंतर प्रगति, समृद्धि और विकास की कामना की।