नोएडा, 19 अगस्त । साइबर अपराधियों ने खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताकर सेक्टर-49 निवासी एक कारोबारी से एक करोड़ 13 लाख रुपये ठग लिये। आरोपियों ने व्हाट्सऐप के जरिये संपर्क कर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। शुरुआत में पीड़ित को 50 हजार रुपये निवेश कराने पर नौ हजार रुपये का मुनाफा देकर भरोसा जीता गया। साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम शैव्या गोयल ने बुधवार काे बताया कि पीड़ित विनीत गोयल ने आज थाना साइबर क्राइम में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उनके अनुसार वह एक कारोबारी हैं। उनके मोबाइल पर आठ दिसंबर 2025 को एक नंबर से व्हाट्सऐप मैसेज आया। बातचीत के दौरान जालसाज ने खुद को शेयर बाजार का विशेषज्ञ बताया और निवेश के जरिये अच्छा मुनाफा कमाने की जानकारी दी। आरोपी ने उन्हें बीएनआई स्टॉक मार्केट कोच मुंबई नाम के व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ दिया। ग्रुप में शेयर बाजार से जुड़े संदेश और निवेश की जानकारी साझा की जाती थी। इसके बाद कारोबारी की एक वेबसाइट पर आईडी रजिस्टर्ड कराई गई।
उन्होंने बताया कि साइबर ठगों ने कारोबारी को शुरुआत में छोटी रकम निवेश करने के लिए कहा। पीड़ित ने करीब 50 हजार रुपये निवेश किए। कुछ समय बाद उनके खाते में नौ हजार रुपये का मुनाफा दिखाया गया। जालसाजों ने रकम वापस मिलने का भरोसा भी दिया। इससे कारोबारी को लगा कि प्लेटफॉर्म वास्तविक है और निवेश से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। फिर ठगों ने निवेश की रकम बढ़ाने के लिए दबाव बनाया। कारोबारी उनके झांसे में आते गए। आरोपी रोजाना उनके नाम का स्क्रीनशॉट भेजते, जिसमें निवेश की रकम के साथ मुनाफा बढ़ता दिखाया जाता था। फर्जी स्क्रीनशॉट और वेबसाइट पर लगातार बढ़ती रकम देखकर पीड़ित को भरोसा होता गया।
इसके बाद उन्होंने कई बार में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।शिकायत के मुताबिक, पीड़ित ने 14 दिसंबर को 10 लाख रुपये, 17 दिसंबर को दो बार में 30 लाख रुपये, 19 दिसंबर को 12 लाख रुपये और 31 दिसंबर को दो बार में 10 लाख रुपये समेत कई अन्य ट्रांजेक्शन किए। इस तरह अलग-अलग खातों में कुल 1.13 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। वेबसाइट पर पीड़ित को निवेश की रकम के साथ मुनाफा भी दिखाई देता रहा। मार्च 2026 में कारोबारी को रुपये की जरूरत पड़ी। उन्होंने निवेश की रकम निकालने का प्रयास किया, लेकिन रकम उनके खाते में नहीं आई। इसके बजाय जालसाजों ने उनसे और रुपये जमा करने के लिए कहा। इसके बाद पीड़ित को शक हुआ। उन्होंने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने व्हाट्सऐप पर मैसेज का जवाब देना और फोन उठाना बंद कर दिया गया। वर्ष 2026 के जून माह में पीड़ित को पूरी तरह से समझ में आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। साइबर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया। पुलिस अब जालसाजों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सऐप ग्रुप और वेबसाइट की जानकारी जुटा रही है। जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी भी जांच की जा रही है।