धर्मशाला, 22 सितंबर । हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, धर्मशाला में हिंदी विभाग एवं राजभाषा अनुभाग के संयुक्त तत्वावधान में “भारतीय ज्ञान परम्परा और हिंदी भाषा” तथा “इक्कीसवीं सदी में हिंदी भाषा और साहित्य : चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में भारतीय ज्ञान परम्परा, भारतीय भाषाओं की समृद्ध विरासत, हिंदी की संपर्क एवं संवाद भाषा के रूप में भूमिका तथा वर्तमान समय में हिंदी भाषा और साहित्य के समक्ष उपस्थित चुनौतियों एवं संभावनाओं पर व्यापक एवं सार्थक मंथन हुआ। उद्घाटन सत्र में समाजसेवी नागेन्द्र सिंह रावल मुख्य अतिथि रहे। वहीं कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल कार्यक्रम अध्यक्ष तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
भाषा हमारे जीवन का धरातल है और शब्द व्यक्ति के विचार : रावल
मुख्य अतिथि नागेन्द्र सिंह रावल ने कहा कि मन के भाव जब सही शब्दों के माध्यम से व्यक्त होते हैं तो उनका प्रभाव अत्यंत व्यापक होता है। भाषा हमारे जीवन का धरातल है और शब्द व्यक्ति के विचार, व्यवहार, संस्कार तथा चरित्र को प्रभावित करने की शक्ति रखते हैं। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा में ‘गुरु’ शब्द की गुरुता को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। मनुष्य के जीवन में संकल्प और सिद्धि के बीच दिग्दर्शन की आवश्यकता होती है और भारतीय परम्परा ने इस दायित्व को गुरु के माध्यम से समझा है।
वहीं कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने कहा कि जीवन में भाषा ही रंग भरती है। भाषा मनुष्य के अनुभवों, संवेदनाओं और विचारों को अभिव्यक्ति प्रदान करती है तथा व्यक्ति और समाज के बीच संबंधों को अर्थ देती है। उन्होंने कहा कि भाषा अतीत को अभिव्यक्ति देती है, वर्तमान को जोड़ती है और भविष्य को दिशा देती है। किसी राष्ट्र की परम्परा, संस्कृति, सभ्यता और सामूहिक चेतना को समझना हो तो भाषा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। भाषा केवल संचार का साधन नहीं, बल्कि किसी राष्ट्र की स्मृति, ज्ञान और सांस्कृतिक निरंतरता की आधारभूमि है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने अपनी आत्मकथा ‘संस्कार से संकल्प’ की प्रति मुख्य अतिथि नागेन्द्र सिंह रावल को भेंट की। कार्यक्रम में अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. प्रदीप कुमार, अधिष्ठाता भाषा संकाय प्रो. बृहस्पति मिश्र, हिंदी विभाग के सभी आचार्य, हिंदी अधिकारी डॉ. संजय, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।