जयपुर, 19 अक्टूबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2014-18 के दौरान पंचायत विकास व निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के आधार पर सहायक अभियंता की विभागीय जांच किए बिना उससे की जाने वाली वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने पंचायती राज सचिव, दौसा कलेक्टर, और दौसा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सहित अन्य से जवाब मांगा है। जस्टिस अनूप कुमार ने यह आदेश इन्द्राज की याचिका पर दिए।
याचिका में अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा ने बताया कि याचिकाकर्ता पूर्व में पंचायत समिति बांदीकुई में कनिष्ठ अभियंता पद पर रहा था। विभागीय अफसरों ने उसके तत्कालीन कार्यकाल में ग्राम पंचायत बालाहेड़ा में हुए विकास एवं निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताएं बताकर उनसे राशि वसूलने का निर्देश दिया। वहीं तय अवधि में राशि जमा नहीं कराने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि राजस्थान सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील नियम, 1958 की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना उससे वसूली कार्रवाई शुरू की है, जबकि उसके कार्यकाल में निर्माण कार्य में कोई अनियमितता नहीं हुई। विभागीय अफसरों ने 10 साल बाद कथित अनियमितता में याचिकाकर्ता सहित तत्कालीन सरपंच, सचिव एवं अन्य कर्मचारियों की अलग अलग व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की है। याचिका में कहा गया कि किसी सरकारी कर्मचारी पर वित्तीय दायित्व निर्धारित करने और वसूली से पहले लागू सेवा नियम व प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन जरूरी है। इसलिए उससे वसूली पर रोक लगाई जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने वसूली पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।