सीवान, 06 नवंबर । सीवान की समृद्ध लोकसंस्कृति और सदियों पुरानी कलात्मक विरासत को राजधानी पटना में नया मंच मिला है। पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में आयोजित लोककला प्रदर्शनी ‘जुगनू हाट’ में सीवान के प्राचीन लोकनृत्य ‘पखाउज’ की प्रस्तुति ने कला प्रेमियों का मन मोह लिया। ग्रामीण लोक कलाकारों ने जब अपनी पारंपरिक कला और नृत्य का प्रदर्शन किया, तो सांस्कृतिक संध्या में मौजूद दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
लोकनृत्य की अनूठी शैली और पारंपरिक अंदाज ने सीवान की लोकसंस्कृति की विशिष्ट पहचान को सामने रखा। ई. विनय चौहान के सहयोग से सीवान से पहुंचे पखाउज के ग्रामीण कलाकारों ने सांस्कृतिक संध्या में अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान कवि नीलोत्पल मृणाल समेत राज्य के कई गणमान्य लोग और कला प्रेमी मौजूद रहे।
कलाकारों की प्रस्तुति को खूब सराहना मिली। अपने हुनर पर मिली प्रशंसा से कलाकार भी उत्साहित दिखे। लंबे समय से ग्रामीण परिवेश में सहेजी जा रही इस लोकनृत्य परंपरा को राजधानी के प्रतिष्ठित मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर कलाकारों के लिए खास रहा। इस आयोजन में सीवान की प्राचीन लोककला ‘दूसूती’ भी आकर्षण का केंद्र बनी रही। दूसूती कला की ग्रामीण महिला कलाकारों की कलाकृतियों को सैकड़ों लोगों ने देखा।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेंद्र पासवान, बापू टावर के प्रमुख विनय कुमार और कवि नीलोत्पल मृणाल ने कलाकारों से बातचीत कर उनका उत्साहवर्धन किया। दूसूती कलाकार आरती देवी की कलाकृतियों को विशेष सराहना मिली। कला मर्मज्ञ चंदन श्रीवास्तव ने बताया कि दूसूती की कलाकृतियों को देखकर पटना के कला प्रेमी अभिभूत नजर आए।
जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा के मार्गदर्शन में सीवान जिला प्रशासन और रसमंजरी फाउंडेशन के सहयोग से जिले के लोक कलाकारों को यह राज्यस्तरीय मंच उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पारंपरिक कला और लोकनृत्य को पहचान दिलाने के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन करना है। कार्यक्रम की आयोजिका डॉ स्मृति पासवान ने बताया कि ‘जुगनू हाट’ का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों, बुनकरों और हस्तशिल्पकारों को प्रोत्साहित करना तथा विलुप्त होती लोककलाओं को संरक्षण प्रदान करना है।
रसमंजरी फाउंडेशन के संरक्षक मंडल के सदस्य डॉ राजन कल्याण सिंह, डॉ शरद चौधरी, रूपेश कुमार तथा निदेशक अनिल कुमार श्रीवास्तव और कन्नूप्रिया ने सीवान की लोककला को पटना में मिली प्रतिष्ठा पर प्रसन्नता जतायी। उन्होंने लोककलाओं को राज्यस्तरीय पहचान दिलाने की पहल के लिए जिलाधिकारी के प्रति आभार व्यक्त किया। पखाउज लोकनृत्य की प्रस्तुति ने यह साबित किया कि सीवान के गांवों में आज भी ऐसी सांस्कृतिक विरासत मौजूद है, जिसे उचित मंच और प्रोत्साहन मिले तो वह प्रदेश ही नहीं, देशभर में अपनी अलग पहचान बना सकती है।