जयपुर, 14 फ़रवरी । संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि कभी सूखाग्रस्त और रेतीले धोरों के लिए पहचाना जाने वाला राजस्थान आज कृषि क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रहा है। कृषि वैज्ञानिकों और काश्तकारों की मेहनत से प्रदेश में अनार, अंजीर और खजूर जैसे फलों की उत्कृष्ट पैदावार हो रही है। गाजर का बड़े पैमाने पर अन्य शहरों में निर्यात किया जा रहा है, वहीं मूंगफली की भी बेहतरीन उपज सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि मंडियों की स्थापना से किसानों को विपणन में बड़ा लाभ मिलेगा।
पटेल शनिवार को कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में नाबार्ड, इफको एवं आत्मा (कृषि विभाग) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वृहद कृषि विज्ञान मेले में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक जैविक उर्वरकों के नए विकल्प विकसित कर रहे हैं। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसानों को गुणवत्ता और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जैविक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
मंत्री ने किसानों से अपने खेतों में डिग्गी-पौंड की अवधारणा अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे जल संरक्षण के साथ फसल उत्पादन में भी वृद्धि होगी।
युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कृषि में नवाचार और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा किसान की समृद्धि से ही प्रदेश और देश की आर्थिक उन्नति संभव है।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि किसान आयोग के अध्यक्ष सीआर चौधरी ने कहा कि उन्नत खेती का संदेश गांव-ढाणी तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी कम करने में कृषि सबसे प्रभावी माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाना आवश्यक है। जैविक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है, इसलिए किसान इस दिशा में गंभीरता से कार्य करें।
मेले के दौरान स्मारिका सहित विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही सर्वश्रेष्ठ स्टॉल और कृषि में नवाचार करने वाले किसानों को सम्मानित भी किया गया।
“मरुधरा में विकसित कृषि: आत्मनिर्भर भारत” थीम पर आयोजित मेले में 125 से अधिक सरकारी व गैर-सरकारी स्टॉल्स लगाए गए। इनमें कृषि स्टार्टअप, आधुनिक उपकरण, मूल्य संवर्धन तकनीक, उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, आयुर्वेदिक उत्पाद तथा कृषि मशीनरी का प्रदर्शन किया गया। विभिन्न संस्थाओं ने किसानों को योजनाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई।
मेले में आए किसानों को वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने अनुसंधान क्षेत्रों का भ्रमण कराते हुए उन्नत बीज और नई तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही किसानों के लिए तकनीकी सत्रों का आयोजन भी किया गया।