सोलन, 17 फरवरी । हिमाचल प्रदेश के बघाट अर्बन सहकारी बैंक की वार्षिक आम सभा मंगलवार को सोलन में हंगामे के बीच संपन्न हुई। बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने बैंक पर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा पिछले वर्ष लगाई गई प्रतिबंधात्मक सीमा (कैपिंग) को लेकर बैंक प्रबंधन और निदेशक मंडल पर कड़ा रोष व्यक्त किया।
प्रतिनिधियों का कहना था कि छह माह की कैपिंग अवधि में से चार माह बीत चुके हैं और केवल दो माह शेष हैं, लेकिन अब तक गठित जांच समिति ने उन कर्मचारियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए, जिन्होंने बिना पर्याप्त जांच के ऋण वितरित किए। उन्होंने मांग की कि दोषियों का खुलासा आम सभा में किया जाए और जिम्मेदारी तय की जाए।
शेयरधारकों ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद बैंक की वित्तीय स्थिति लगातार कमजोर हुई और आज सबसे बड़ी चुनौती जमाकर्ताओं का विश्वास बहाल करना है। उनका कहना था कि यदि कैपिंग हटती है और बैंक अनुत्पादक परिसंपत्तियों से बाहर आता है तो धन निकासी के लिए लंबी कतारें लग सकती हैं। उन्होंने बैंक के मूल्यांकनकर्ताओं की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए।
सभा में घाटे वाली शाखाओं को बंद करने और लगभग 30 करोड़ रुपये के संदिग्ध ऋण मामलों की जांच का मुद्दा भी उठा। बैंक के विलय के प्रस्ताव का भी कुछ सदस्यों ने विरोध किया।
बैंक के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि बैंक का अनुत्पादक ऋण 132 करोड़ से घटकर 112 करोड़ रुपये रह गया है। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के सहयोग से जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर बैंक को पूर्व स्थिति में लाने का प्रयास किया जाएगा।