ग्रामीण अर्थव्यवस्था जैसी जमीनी समस्याओं का समाधान करने में पूरी तरह विफल रहा है।
बजट में न तो युवाओं के लिए रोजगार के ठोस अवसर दिखाई देते हैं और न ही किसानों की
आय बढ़ाने के लिए कोई प्रभावी योजना सामने आई है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा जैसे कृषि
प्रधान राज्य के लिए बजट में कोई विशेष पैकेज या ठोस प्रावधान नहीं किया गया, जिससे
किसानों, मजदूरों और ग्रामीण वर्ग में भारी निराशा है। मनरेगा को लेकर राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि केंद्र
सरकार इस महत्वपूर्ण योजना को लगातार कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जबकि मनरेगा
गरीब और मजदूर वर्ग के लिए केवल एक योजना नहीं बल्कि सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार
है। उन्होंने कहा कि 100 दिन के काम की कानूनी गारंटी को व्यवहार में कमजोर किया जा
रहा है, मजदूरी का भुगतान समय पर नहीं हो रहा और न्यूनतम मजदूरी के अधिकारों पर भी
लगातार हमले किए जा रहे हैं।
राव नरेन्द्र ने कहा कि अगर भाजपा को अपने कार्यों
पर घमंड है तो मतपत्र से चुनाव कराएं। वह दिन दूर नहीं जब पार्टियां चुनाव का बहिष्कार
शुरू कर देंगी। अगर निष्पक्ष चुनाव नहीं होंगे तो क्या फायदा होगा, देश में गृहयुद्ध
हो जाएगा। दूसरे देशों की तरह से लोग सड़कों पर आ जाएंगे। कांग्रेस के समय भी ईवीएम
थी लेकिन कभी किसी को शक नहीं था। अगर कांग्रेस गड़बड़ी करती तो भाजपा कभी सत्ता में
नहीं आ पाती। किस तरह से वोट चोरी की गई उसका साफ उदाहरण हमारे सामने हैं। निश्चित
तौर पर हरियाणा के चुनाव में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि बंगाल प्रदेश के चुनाव
में गठबंधन को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष फैसला लेंगे। मेरी निजी राय है कि सभी को मिलकर
लड़ना चाहिए। एकजुट होकर भाजपा को हराना चाहिए।
राव नरेंद्र सिंह ने संगठनात्मक स्थिति पर जानकारी
देते हुए कहा कि हरियाणा में जिला संगठन का पुनर्गठन तेजी से किया जा रहा है। प्रदेश
के कुल 33 जिलों में से 26 जिलों की कार्यकारिणी घोषित की जा चुकी है। शेष बचे जिलों
की सूची भी शीघ्र जारी कर दी जाएगी।