उर्वरकों के साथ जबरन उत्पाद देने पर सरकार सख्त, 169 विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित-निरस्त

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जयपुर, 06 मार्च । कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि उर्वरकों के साथ किसानों को जबरन अन्य उत्पाद जोड़कर देने की शिकायतों पर राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने बताया कि अधिसूचित 744 उर्वरक निरीक्षकों ने औचक निरीक्षण करते हुए 11,938 जांच की और 18,319 उर्वरकों के नमूने लिए। इस दौरान 765 फर्मों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए, 381 फर्मों की बिक्री पर रोक लगाई गई तथा 169 विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र निलंबित या निरस्त किए गए।

कृषि मंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक ललित मीणा द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कई बार उर्वरकों के साथ ऐसे उत्पाद अटैच कर दिए जाते हैं जिनकी किसानों को आवश्यकता नहीं होती, जिससे उन पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ता है। इसे रोकने के लिए विभाग द्वारा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं और उर्वरक विक्रेताओं व आपूर्तिकर्ताओं को भी चेताया गया है। कई स्थानों पर विभागीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाकर उर्वरकों का वितरण भी कराया गया।

उन्होंने बताया कि उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी के लिए राज्य और जिला स्तर पर फर्टिलाइजर रेगुलेटरी टास्क फोर्स का गठन किया गया है। साथ ही “धरती माता बचाओ अभियान” के तहत उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जबरन अटैचमेंट, अवैध बिक्री, तस्करी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए जिला, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर निगरानी समितियां बनाई गई हैं।

कृषि मंत्री ने कहा कि कई बड़ी कंपनियों के खिलाफ भी जबरन अटैचमेंट की शिकायतें मिली हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं सूरतगढ़ जाकर 32 हजार यूरिया के बैग पकड़े गए ताकि उनका डायवर्जन रोका जा सके। यदि बड़ी कंपनियों के खिलाफ शिकायतें मिलती हैं तो उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच की जाएगी और लाइसेंस भी निरस्त किए जाएंगे। सीमावर्ती जिलों में उर्वरकों के डायवर्जन और तस्करी को रोकने के लिए पुलिस के सहयोग से अतिरिक्त चेक पोस्ट भी स्थापित किए जाएंगे।

मूल प्रश्न के लिखित उत्तर में कृषि मंत्री ने बताया कि भरतपुर और कोटा संभाग में सरसों की बुवाई अधिक होने के कारण डीएपी उर्वरक की मांग ज्यादा रहती है। रबी सीजन शुरू होने से पहले ही राज्य सरकार ने एक लाख मीट्रिक टन डीएपी का स्टॉक सुनिश्चित किया था। रबी सीजन 2025-26 की शुरुआत में भरतपुर और कोटा संभाग में 30,658 मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध था। उन्होंने बताया कि बारां और झालावाड़ जिलों में उर्वरकों के साथ जबरन अटैचमेंट की 16 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिन पर उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत संबंधित विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए। वहीं भरतपुर, धौलपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर और कोटा जिलों में ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई।

कृषि मंत्री ने बताया कि पूर्वी राजस्थान से अन्य राज्यों में उर्वरकों की तस्करी की चार शिकायतें मिली थीं, जिनमें 28.55 मीट्रिक टन यूरिया और 17.50 मीट्रिक टन एसएसपी उर्वरक जब्त किए गए और संबंधित पुलिस थानों में चार एफआईआर दर्ज करवाई गई। पिछले छह माह में भरतपुर और कोटा संभाग में 1373 आदान विक्रेताओं के औचक निरीक्षण किए गए, जिनमें उल्लंघन पाए जाने पर 53 विक्रेताओं की बिक्री रोकी गई, 98 लाइसेंस निलंबित या निरस्त किए गए तथा दो विक्रेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।