गुरुग्राम: घर में पंचामृत का होना वंश, सम्मान, धन व प्रेम बढ़ाता है: कौशिक जी महाराज

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गुरुग्राम, 15 फरवरी । गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और चीनीद्ध हर घर में होना चाहिए। जिस घर में दूध मिलता है वहां वंश वृद्धि होती है। दही से सम्मान बढ़ता है। घी से धन बढ़ता है, शहद से निरोगता रहती है और चीनी से दुश्मन को अपना बनाया जा सकता है। इसलिए पंचामृत हर घर में होना चाहिए।

महाराज जी रविवार को गुरुग्राम में सोहना अड्डा के निकट ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के चौथे दिन महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालुओं के समक्ष प्रवचन दे रहे थे। परिवार की एकता पर कौशिक जी महाराज ने कहा कि वे माता-पिता धन्य हैं, जो अपने जीते जी अपने बच्चों को अलग-अलग ना हों। अलग-अलग की परिभाषा समझाते हुए उन्होंने कहा कि चूल्हा अलग हो जाना, दूसरा घर ले लेना अलग नहीं कहलाता। अलग होना वह है जहां बहुएं एक-दूसरे से बात ना करती हों। भाइयों में बात ना होती हो। त्योहारों पर एक-दूसरे का मुंह तक ना देखा जाए। इसलिए अपने बेटे, बहुओं को कथाओं में लेकर आया करें, ताकि उनका ह्दय परिवर्तन हो। उन्होंने कहा कि शिक्षा में भी परिवार की बातें होनी चाहिए, ताकि परिवारों को जोडक़र रखा जा सके।

कौशिक जी महाराज ने महादेव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि तीनों गुणों को जिसने जीत लिया है, ऐसे अखंड शिव का हम ध्यान करते हैं। दुनिया की कोई ऐसी समस्या नहीं है, जो महादेव के आगे टिक सके। उनकी कृपा पूरे जन्मपत्र को बदल सकती है। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि शंकर जिस पर प्रसन्न है उसका कुछ नहीं बिगड़ सकता। महादेव के दर्शन मात्र से संपूर्ण देवताओं के दर्शन का फल मिलता है। उन्होंने पूजा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस दिन शिवजी का कोई पर्व हो तो बेल पत्र तोड़ सकते हैं, मगर बेल फल नहीं तोड़ सकते। उन्होंने कहा कि शुक्ल पक्ष की एकादशी पर यदि कोई भोजन त्याग देता है तो भगवान महादेव प्रसन्न हो जाते हैं। जो एकादशी करते हैं उनको अन्न लेना ही नहीं है। जो एकादशी नहीं करते हैं, वे रात को भोजन लें लें एकादशी का फल मिलेगा।