गुज़ारा भत्ता न चुकाने के कारण मई 2025 से लगातार हिरासत में व्यक्ति, हाईकोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण

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प्रयागराज, 02 अप्रैल । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट से उस व्यक्ति की लगातार हिरासत के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, जिसने गुज़ारा भत्ता नहीं चुकाया।

आरोप है कि वह व्यक्ति 23 मई, 2025 से लगातार हिरासत में है। जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की कोर्ट ने यह स्पष्टीकरण तब मांगा, जब वह प्रेम सिंह नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीज़न याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

प्रेम सिंह ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज द्वारा 9 जनवरी, 2026 को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 (3) के तहत एक कार्यवाही में पारित आदेश को चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि किसी व्यक्ति को हिरासत से रिहा किए बिना नए आदेश जारी करके लगातार हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(3) के तहत, वारंट जारी होने के बाद बिना चुकाए गुज़ारा भत्ते की राशि के लिए अधिकतम सज़ा एक महीने तक हो सकती है।

वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले, ‘रजनीश बनाम नेहा’ का हवाला दिया, जिसमें यह कहा गया कि गुज़ारा भत्ते की राशि की वसूली एक श्मनी सूट (पैसे के मुक़दमे) के तौर पर की जानी चाहिए। साथ ही इस मक़सद के लिए उसकी सम्पत्ति कुर्क की जा सकती है।

याची के अधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया फ़ैसले ‘मोहम्मद शहज़ाद बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और 2 अन्य’ का भी हवाला दिया, जिसमें यह कहा गया कि गुज़ारा भत्ते के आदेश को लागू करवाने के लिए नियमित गिरफ़्तारी वारंट जारी नहीं किए जा सकते। इन दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज को निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई की तारीख, 6 अप्रैल, 2026 तक या उससे पहले इस मामले पर अपना स्पष्टीकरण पेश करें।