दमोह, 12 मार्च । मध्य प्रदेश के दमोह में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विक्रांत चौहान, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं सिविल सर्जन डॉ. संगीता त्रिवेदी तथा डॉ. प्रहलाद पटेल ने एचपीवी टीकाकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
चिकित्सकों ने बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण महिलाओं में होने वाले गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर का प्रमुख कारण माना जाता है। इसी गंभीर बीमारी से बचाव के उद्देश्य से यह टीकाकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिससे किशोरियों को भविष्य में इस प्रकार की बीमारी से सुरक्षा मिल सके।
वैक्सीन के निर्माण को लेकर दी जानकारीपत्रकार वार्ता के दौरान चिकित्सकों ने बताया कि एचपीवी वैक्सीन को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस वैक्सीन में न तो जीवित वायरस का उपयोग किया गया है और न ही मृत वायरस का। इसमें केवल वायरस के बाहरी आवरण का एक छोटा सा हिस्सा शामिल किया गया है। यह हिस्सा शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है, जिससे शरीर उस वायरस के खिलाफ सुरक्षा विकसित कर लेता है।
विश्व के 165 देशों में उपयोगस्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि यह वैक्सीन दुनिया के लगभग 165 देशों में पहले से उपयोग में लाई जा रही है और इसे सुरक्षित तथा प्रभावी माना गया है। पहले यह टीका केवल निजी अस्पतालों में उपलब्ध था, जहां इसे लगवाने के लिए लोगों को बड़ी राशि खर्च करनी पड़ती थी।
अब किशोरियों को निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा टीकाचिकित्सकों ने बताया कि भारत सरकार द्वारा अब इस टीके को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर देश की उन किशोरियों को, जिनकी आयु 14 से 16 वर्ष के बीच है, यह टीका निःशुल्क लगाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक बालिकाएं इस गंभीर बीमारी से सुरक्षित रह सकें।
गर्भधारण से जुड़े भ्रम पर दिया स्पष्टीकरणपत्रकार वार्ता के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में चिकित्सकों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि इस टीके के लगने के बाद भविष्य में गर्भधारण करने में किसी प्रकार की समस्या आती है। उन्होंने कहा कि अब तक ऐसा कोई प्रमाणित मामला सामने नहीं आया है, इसलिए इस प्रकार की बातें केवल भ्रांतियां हैं।चिकित्सकों ने बताया कि यह वैक्सीन केवल उन वायरस प्रकारों पर प्रभाव डालती है जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकते हैं।
बीमारी से पहले बचाव पर सरकार का जोरविशेषज्ञों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना ही नहीं है, बल्कि लोगों को बीमार होने से पहले ही सुरक्षित करना भी है। इसी सोच के तहत टीकाकरण कार्यक्रमों को प्राथमिकता दी जा रही है।उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग एक ओर जहां लोगों को गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण कार्यक्रम चला रहा है, वहीं दूसरी ओर जिन लोगों को बीमारी का सामना करना पड़ता है, उनके इलाज के लिए भी विभिन्न योजनाओं और स्वास्थ्य सेवाओं के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
लोगों से की जागरूक रहने की अपीलपत्रकार वार्ता के दौरान चिकित्सकों ने सरल और स्पष्ट शब्दों में वैक्सीन के निर्माण, उसके लाभ, टीकाकरण की प्रक्रिया तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही तैयारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और भ्रांतियों पर ध्यान न दें और सही जानकारी के आधार पर ही स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लें। साथ ही अभिभावकों से भी आग्रह किया गया कि वे टीकाकरण कार्यक्रम के प्रति जागरूक रहें और अपने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आगे आएं।