रांची, 13 मार्च । विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को विधायक नीरा यादव ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग एवं महिला, बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग के बजट आवंटन पर लाए गए कटौती प्रस्ताव के पक्ष में अपनी बातें रखीं।
उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले सरकार ने ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन चुनाव जीतने और सत्ता में आने के बाद यह घोषणा सिर्फ कागजी सुंदरता तक ही सीमित रह गई है। सरकार को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
विधायक ने कहा कि सत्ता पक्ष को दिल्ली फोबिया हो गया है और उन्हें अच्छे डॉक्टर से दिखाने की जरूरत है। सत्ता पक्ष को यह भी समझना चाहिए कि पहले वृद्ध पेंशन 600 रुपये मिलती थी और इसी तरह दिव्यांगजनों को भी 600 रुपये ही पेंशन मिलती थी, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार ने बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिमाह करने का काम किया था। अब समय के साथ इसे और बढ़ाने की जरूरत है।
विधायक नीरा यादव ने कहा कि आज साहेबगंज, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा सहित कई जिलों में ओबीसी आरक्षण को घटाकर शून्य कर दिया गया है, जो एक बड़ा सवाल है और इस पर सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग में भी आरक्षण लागू करने की बात कही गई थी, लेकिन यह धरातल पर नहीं दिखता। ओबीसी, एसटी और एससी जाति प्रमाण-पत्र बनवाने में छात्रों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए सरकार को चाहिए कि स्थानीय स्तर पर शिविर लगाकर जाति प्रमाण-पत्र बनाने की सुविधा दी जाए, ताकि छात्रों को अंचल और प्रखंड कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि शून्य से लेकर 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए बजट में कई कल्याणकारी योजनाएं शामिल करते हुए सरकार ने बजट प्रस्तुत किया है, लेकिन धरातल पर इन योजनाओं का असर दिखाई नहीं देता।
उन्होंने कहा कि आज आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है और कई बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। विधायक ने कहा कि कोडरमा के आदिवासी छात्रावास की स्थिति काफी जर्जर है, जिससे छात्रों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रावासों में बच्चों को बासी भोजन तक परोसा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जामताड़ा में 13 वर्ष की एक बच्ची की मौत का मामला भी सामने आया है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही को दर्शाता है।
इस दौरान विधायक प्रदीप ने बीच में हस्तक्षेप किया, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें अपने समय का इंतजार करने की नसीहत दी। इसके बाद सदन में कुछ समय के लिए हंगामा भी हुआ। भाजपा के अन्य सदस्यों ने भी इस पर आपत्ति जताई।
नीरा यादव ने कहा कि प्रदीप यादव वरिष्ठ नेता हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वही सबसे अधिक ज्ञानी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासी हित में काम करने की जरूरत है।