रांची, 18 मार्च । झारखंड उच्च न्यायालय में बुधवार को रामगढ़ के प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने आदेश के अनुपालन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष रामगढ़ के उपायुक्त (डीसी) पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि निर्देशों के तहत कुछ कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि कुछ कार्य अभी शेष हैं। उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर परिसर में करीब आठ चेंजिंग रूम बनाए गए हैं और आसपास स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है। साथ ही सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कुछ कंपनियों के साथ एमओयू भी किया गया है।
हालांकि, अदालत ने कार्यों को संतोषजनक नहीं मानते हुए अगली सुनवाई में पर्यटन सचिव और रामगढ़ डीसी दोनों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। अदालत ने आदेश के अनुपालन से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की गई है।
खंडपीठ ने रामगढ़ डीसी को मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया। साथ ही नदी तट पर रेड जोन बनाकर घेराबंदी करने को कहा, ताकि डूबने की घटनाओं को रोका जा सके।
प्रार्थी संजीव कुमार की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने अदालत को बताया कि पूर्व आदेश का पूर्ण पालन नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि चेंजिंग रूम नदी तट से दूर बनाए गए हैं और मंदिर परिसर के आसपास अतिक्रमण अब भी बना हुआ है।
गौरतलब है कि यह अवमानना याचिका 11 अगस्त 2023 को जनहित याचिका में दिए गए आदेश के अनुपालन को लेकर दायर की गई है। उस आदेश में राज्य सरकार, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाट, चेंजिंग रूम, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं और अतिक्रमण हटाने सहित कई आवश्यक निर्देश दिए गए थे।————