एक खराब मूव खेल बिगाड़ सकता है, उससे सीख लेकर आगे बढ़ें- विश्वनाथन आनंद

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जयपुर, 16 जनवरी । विश्व शतरंज चैंपियन रहे विश्वनाथन आनंद नेनए खिलाड़ियों को संदेश देते हुए कहा है कि खेल में हमेशा सफलता मिलना संभव नहीं होता। एक खराब मूव आपके खेल को बिगाड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हार से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। जीत-हार को ज्यादा मन पर न लें, लगातार अपने खेल में सुधार करते रहें और खेलते रहें।

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन शुक्रवार को अपनी किताब लाइटनिंग किड से जुडे सत्र में विश्वनाथन आनंद ने राहुल भट्टाचार्य के साथ बातचीत में शतरंज के साथ साथ युवा, परिवार, एआई और मानवीय भावनाओं से जुड़े सवालों पर भी चर्चा की। आनंद ने अपने करियर की यात्रा साझा करते हुए कहा कि उनकी सफलता में माता-पिता, विशेषकर उनकी मां की अहम भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में मिले सहयोग और मार्गदर्शन ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की ताकत दी। उन्होंने एक बेहद भावुक बात साझा करते हुए कहा कि मैं आज भी अपनी मां के साथ ताश खेलता हूं और अक्सर उनसे हार जाता हूं। मुझे उनके साथ खेलकर हारना पसंद है क्योंकि वहां हारना मुझे खुश करता है।

एआई की बढ़ती इंपॉर्टेंस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि वे एआई से हर जवाब नहीं खोजते हैं। एआई आपको आसानी से जवाब दे सकता है, लेकिन किसी भी समझने वाले के जवाब का लॉजिक क्या है, यह जानना जरूरी है। उन्होंने एआई को डिपेंडेंट गैजेट्स का नाम दिया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में हर लोग हर छोटे काम के लिए गैजेट्स पर निर्भर हैं। जो हमेशा प्रभावी नहीं रहती। आनंद ने कहा कि कोई गैजेट आपकी बातों को रिकॉर्ड कर सकता है या टास्क याद दिला सकता है, लेकिन हमारी याददाश्त एक अलग तरह से काम करती है, इसलिए इनपर निर्भर रहने की बजाय हम अपनी जरूरी चीजें हाथ से लिखें, क्योंकि लिखने से दिमाग उसे बेहतर तरीके से सहेजने में मदद करता है।

आनंद ने बताया कि शुरुआती दौर में जब भारत में शतरंज को करियर के रूप में बहुत कम लोग देखते थे, तब उनके परिवार ने हर कदम पर उन्हें प्रोत्साहित किया। इसी समर्थन की वजह से वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सके। उन्होंने कहा कि स्कूलों और अकादमियों में लड़कियों की संख्या बढ़ना एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि हारने के बाद गुस्सा आना स्वाभाविक है। कई बार ऐसी स्थिति आती है कि आप अपने प्रतिद्वंदी को नापसंद करने लगते हैं। लेकिन शतरंज का असली मास्टर वही है जो इन भावनाओं पर काबू पा ले और अगले मूव पर ध्यान दे।