इस अवसर पर संविधान में निहित मूल्यों और आदर्शों को दोहराते हुए भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाए रखने का संकल्प लिया गया। साथ ही सभी आम लोगों के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विश्वास, धर्म तथा उपासना की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की शपथ ली गई।
मौके पर अधिकारियों और कर्मचारियों ने व्यक्ति की गरिमा, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत करने वाली बंधुता की भावना को बनाए रखने का भी संकल्प लिया।