उन्होंने बताया कि इस विशेष अवसर पर आर्ट ऑफ़ लिविंग के बेंगलुरु आश्रम से पधारे स्वामी जी द्वारा विधिवत महा रुद्र पूजा संपन्न कराई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ ज्योतिर्लिंग को लगभग 1000 वर्ष पूर्व नष्ट कर दिया गया था। कहा जाता है कि दक्षिण भारत के अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार ने उस समय शिवलिंग के टूटे हुए पवित्र अंशों को सुरक्षित अपने पास रख लिया था और पिछले एक हजार वर्षों से वह परिवार इन अंशों की गुप्त रूप से पूजा करता आ रहा है।
हाल ही में उस परिवार के सदस्य पं. सीताराम शास्त्री ने आर्ट ऑफ़ लिविंग के आध्यात्मिक गुरु पूज्य श्री श्री रविशंकर जी से भेंट कर सोमनाथ में पुनः ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा की इच्छा व्यक्त की। बताया गया कि वर्ष 1924 में तत्कालीन शंकराचार्य ने इस परिवार को निर्देश दिए थे कि इस ज्योतिर्लिंग को 100 वर्षों तक गुप्त रखकर पूजा करें, और जब दक्षिण भारत में शंकर नाम से कोई महान गुरु प्रकट हों, तब उन्हें यह पवित्र धरोहर ससम्मान सौंप दी जाए।
मान्यता है कि यही वह पवित्र शिवलिंग है, जो कभी गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए हवा में स्थिर रहता था। आर्ट ऑफ़ लिविंग परिवार ने इसे सिवनी की धर्मप्रेमी जनता का सौभाग्य बताते हुए अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से उपस्थित होकर इस दुर्लभ एवं ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर का लाभ लेने की अपील की है।