मप्र: जल संसाधन विभाग में टेंडर प्रक्रिया पर कांग्रेस के सवाल, फर्जी बैंक गारंटी और ठेकेदारी नेटवर्क के आरोप, जांच की मांग

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भाेपाल, 11 मार्च । मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बुधवार को भोपाल में आयोजित पत्रकार वार्ता में जल संसाधन विभाग की टेंडर प्रक्रिया, सिंचाई परियोजनाओं और कथित फर्जी बैंक गारंटी के मुद्दे पर राज्य सरकार से कई सवाल किए।

उन्होंने कहा कि सरकार ने इस वर्ष को “कृषि वर्ष” घोषित किया है, लेकिन प्रदेश में कई सिंचाई परियोजनाएं ठप पड़ी हैं और किसान पानी के लिए परेशान हैं। पटवारी ने कहा कि सरकार लगातार कर्ज ले रही है और हाल ही में करीब 5800 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि का उपयोग किस तरह हो रहा है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

टेंडर प्रक्रिया पर उठाए सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग की टेंडर प्रक्रिया में कुछ सीमित कंपनियों का दबदबा दिखाई देता है। उनके मुताबिक कई बड़े टेंडरों में बार-बार वही कंपनियां L1, L2 और L3 के रूप में सामने आती हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने विशेष रूप से फलोदी कंस्ट्रक्शन और गुप्ता कंस्ट्रक्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि कई बड़े टेंडरों में इन कंपनियों की लगातार मौजूदगी दिखाई देती है। गुप्ता कंस्ट्रक्शन के मालिक जगदीश गुप्ता बताए गए हैं। पटवारी ने कहा कि यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि क्या टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।

कुछ व्यक्तियों की भूमिका पर भी सवाल

पत्रकार वार्ता में उन्होंने “नौशाद” और “अश्विन नाटू” नाम के व्यक्तियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पटवारी के अनुसार, ये सरकारी अधिकारी नहीं हैं, फिर भी विभागीय गतिविधियों में इनके नाम चर्चा में आते हैं। उन्होंने कहा कि इन व्यक्तियों और कुछ कंपनियों के बीच संभावित व्यावसायिक संबंधों की जानकारी सामने आई है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

फर्जी बैंक गारंटी का मुद्दा

कांग्रेस ने जल संसाधन विभाग में फर्जी बैंक गारंटी के मामले की भी जांच की मांग की। पटवारी ने कहा कि जल निगम में पहले सामने आए मामले के बाद दिसंबर 2024 में ई-बैंक गारंटी प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन जल संसाधन विभाग और एनवीडीए में यह व्यवस्था अभी तक लागू नहीं की गई है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच की जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

सिंचाई परियोजनाओं और तकनीकी कामों पर भी सवाल

पटवारी ने कुछ परियोजनाओं में तकनीकी अनियमितताओं की शिकायतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आरोप हैं कि कुछ स्थानों पर सस्ती पाइप का उपयोग कर महंगी पाइप का भुगतान निकाला गया है। यदि ऐसा हुआ है तो इसकी तकनीकी और वित्तीय जांच होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-सिंध परियोजना को लेकर भी सरकार से जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की, खासकर पर्यावरण, आदिवासी भूमि और परियोजनाओं के लाभ के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर।

कांग्रेस ने सरकार से मांग की है कि:

जल संसाधन विभाग में जमा सभी बैंक गारंटियों की जांच कराई जाए।

विभाग और एनवीडीए में ई-बैंक गारंटी प्रणाली लागू की जाए।

वर्ष 2023-24 में जारी टेंडरों की न्यायिक जांच कराई जाए।

संबंधित भुगतानों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

पटवारी ने कहा कि सरकार यदि इन मांगों पर कार्रवाई नहीं करती है, तो कांग्रेस 15 दिन बाद इस पूरे मामले को दस्तावेजों के साथ केंद्रीय जांच एजेंसी के समक्ष रखने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों और सिंचाई परियोजनाओं से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंच सके।