फतेहाबाद, 23 फरवरी । जिले में कांग्रेस समर्थिक पंचायत समिति अध्यक्षों को पद से हटाने का सिलसिला जारी है। भट्टू के बाद अब रतिया पंचायत समिति के कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष केवल मेहता को भी सोमवार को अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा। विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी के विरोध करने का उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ा है। केवल मेहता के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव दूसरी बार हुई मीटिंग में सिरे चढ़ गया है। इस दौरान पंचायत समिति के कुल 21 में से 16 सदस्यों ने चेयरमैन के खिलाफ वोट दिया। इसी के साथ अब केवल मेहता चेयरमैन पद से हट गए हैं। केवल मेहता की कुर्सी जाने को पूर्व सांसद एवं विधानसभा चुनाव में रतिया से प्रत्याशी रही सुनीता दुग्गल की जीत के तौर पर देखा जा रहा है। जैसे ही केवल मेहता को पद से हटाने की घोषणा हुई, दुग्गल समर्थकों ने नारेबाजी की खुशियां मनाई। बता दें कि रतिया पंचायत समिति में केवल मेहता कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष थे और वे लगातार अविश्वास प्रस्तावों का सामना कर रहे थे। उन्हें हटाने के लिए 9 जनवरी 2025 को हुई मीटिंग में 22 में से केवल 12 सदस्य पहुंचे, जो 16 के आवश्यक बहुमत से कम थे, इसलिए प्रस्ताव खारिज हो गया और वे अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे। इसके एक साल बाद 9 फरवरी 2026 को पंचायत समिति के 21 में से 16 सदस्यों ने डीसी डॉ.विवेक भारती से मिलकर उनसे अविश्वास प्रस्ताव पर मीटिंग बुलाने की मांग की थी। इसके बाद 19 फरवरी का दिन वोटिंग के लिए तय किया गया था। लेकिन एडीसी अनुराग ढालिया का स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर उस दिन बैठक को स्थगित कर दिया गया था। इससे नाराज होकर पंचायत समिति के 16 सदस्य चंडीगढ़ जाकर सीएम नायब सैनी से मिले थे। उनके साथ पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल भी थीं। सीएम ने डीसी को फोन कर मीटिंग करवाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 23 फरवरी का दिन दोबारा बैठक बुलाई गई थी। आज 21 में से 16 सदस्यों ने चेयरमैन के खिलाफ वोट कर उन्हें पद से हटा दिया। विशेष बात यह है कि केवल कृष्ण मेहता करीब साढ़े तीन साल पहले बीजेपी में रहते हुए ही चेयरमैन बने थे, उस समय वह बीजेपी के मंडल अध्यक्ष थे। रतिया से तत्कालीन बीजेपी विधायक लक्ष्मण नापा के समर्थन से वह चेयरमैन बने, मगर अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान वह लक्ष्मण नापा के साथ ही बीजेपी छोडक़र कांग्रेस में चले गए। नापा और केवल मेहता पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल को रतिया से टिकट दिए जाने से नाराज हो गए थे। उसके बाद विधानसभा चुनाव में दुग्गल 20 हजार से ज्यादा वोटों से हार गई। इससे खफा सुनीता दुग्गल समर्थक लगातार केवल मेहता को कुर्सी से हटाने के प्रयास कर रहे थे, जिसमें सोमवार को उन्हें सफलता मिली।