सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद अदालत में पेश हुए। उनकी ओर से याचिका दायर करने पर आपत्ति उठाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने सीधे ही हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जबकि इसके लिए पहले डीन स्टूडेंट वेलफेयर के समक्ष जाना चाहिए था। इसके अलावा छात्रसंघ चुनाव कराना संवैधानिक रूप से बाध्यकारी नहीं है और ना ही इसमें शामिल होना मूलभूत अधिकार है। वहीं केवल राजस्थान विश्वविद्यालय में चुनाव के लिए ही याचिका पेश हुई है। अन्य किसी भी विवि में छात्रसंघ चुनाव को लेकर याचिका पेश नहीं हुई है। इसके अलावा सेमेस्टर शुरू हुए लंबा समय हो गया है। इसलिए अब चुनाव नहीं कराया जा सकता।
याचिका में अधिवक्ता शांतनु पारीक ने बताया है कि प्रत्येक छात्र को अपना प्रतिनिधि चुनने का संवैधानिक अधिकार है। वहीं लिंगदोह कमेटी के अनुसार सत्र आरंभ होने के छह से आठ सप्ताह में छात्रसंघ चुनाव होने चाहिए। दूसरी ओर राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश कर कहा जा चुका है कि राजस्थान विवि सहित प्रदेश के विश्वविद्यालयों के कुल गुरुओं ने छात्रसंघ चुनाव से पढाई में व्यवधान और माहौल खराब होना बताकर चुनाव नहीं कराने की सिफारिश की है।