राजस्थान आवासन मंडल में 1009 पद खाली, योजनाएं अटकीं

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जयपुर, 29 जनवरी । राजस्थान आवासन मंडल का कार्यक्षेत्र और दायरा लगातार बढ़ने के बावजूद कैडर स्ट्रेंथ के अनुरूप भर्ती नहीं होने से मंडल गंभीर कार्मिक संकट से जूझ रहा है। स्थिति यह है कि 1583 स्वीकृत पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल 574 कर्मचारी व अधिकारी ही कार्यरत हैं, जबकि करीब 1009 पद रिक्त पड़े हैं। इसके चलते अधिकारियों पर काम का अत्यधिक बोझ बढ़ गया है और कई आवासीय योजनाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

राजस्थान आवासन मंडल का गठन वर्ष 1970 में हुआ था, उस समय इसके अधीन 10–12 जिले थे। वर्तमान में मंडल का विस्तार बढ़कर लगभग 28 जिलों तक हो चुका है और जनसंख्या में भी कई गुना वृद्धि हुई है। इसके बावजूद कर्मचारियों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो सकी। लगातार सेवानिवृत्तियों के चलते स्टाफ घटता चला गया। कार्मिकों की कमी को देखते हुए वर्ष 2010 में कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाकर 1583 की गई थी, लेकिन इसके अनुरूप भर्ती नहीं की गई। वर्ष 2022 में 311 पदों की स्वीकृति दी गई, हालांकि भर्ती केवल 198 पदों पर ही हो सकी। यह भर्ती भी दो वर्ष बाद पूरी हुई। इससे पहले वर्ष 1995 में ही बड़े स्तर पर भर्ती हुई थी, जिसके बाद लंबे समय तक नई नियुक्तियां नहीं हुईं।

कर्मचारियों की भारी कमी के चलते कई अधिकारी एक साथ दो से तीन पदों का कार्यभार संभाल रहे हैं। इसका सीधा असर योजनाओं पर पड़ा है। चौमूं आवासीय योजना, इंदिरा गांधी नगर विस्तार सहित कई परियोजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। इससे खातेदारों, आमजन और स्वयं आवासन मंडल को आर्थिक नुकसान हो रहा है। नई योजनाएं नहीं आने से मंडल के राजस्व पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पिछले वर्षों में डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, दौसा, पाली, जैसलमेर और जगतपुरा के खंड कार्यालय बंद किए जा चुके हैं। इसके अलावा झुंझुनूं, नागौर और भरतपुर के खंड कार्यालय बंद करने के आदेश भी जारी हो चुके हैं, हालांकि फिलहाल राजनीतिक दबाव के चलते वहां काम जारी है।

राजस्थान आवासन मंडल की स्थापना 24 फरवरी 1970 को आवासविहीन लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और अल्प आय वर्ग के लिए सस्ते व गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। इस संबंध में आवासन मंडल के सचिव गोपाल सिंह ने कहा कि कैडर स्ट्रेंथ बढ़ाने सहित अन्य बिंदुओं पर काम किया जाएगा, ताकि स्टाफ की संख्या बढ़े और कार्य में आ रही समस्याओं का समाधान हो सके।