जयपुर, 14 फ़रवरी । राजस्थान उच्च न्यायालय ने फर्जी दिव्यांग पत्र के आधार पर ग्राम विकास अधिकारी की सेवा समाप्त करने वाले टोंक जिला परिषद व स्थानीय पंचायत समिति के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में प्रमुख पंचायती राज सचिव, टोंक जिला परिषद के सीईओ सहित टोंक पंचायत समिति से जवाब तलब किया है। जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश टोंक पंचायत समिति के पराना ग्राम विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत शाहरुख खान की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता लक्ष्मीकांत मालपुरा ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता का 10 अप्रैल, 2023 को ग्राम विकास अधिकारी के पद पर चयन हुआ था। याचिकाकर्ता ने नियुक्ति के समय मेडिकल बोर्ड से बना दिव्यांग प्रमाण पत्र पेश कर दिया था। जिसमें उसकी दिव्यांगता चालीस फीसदी आई थी। वहीं कार्यभार ग्रहण करने के बाद जिला परिषद बाद में उसका पुन: मेडिकल कराया। जिसके उसकी दिव्यांगता शून्य दर्शाते हुए उसे गत दिनों ग्राम विकास अधिकारी पद से बर्खास्त कर दिया। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया पूर्व में मेडिकल परीक्षण होने के बाद उसका पुन: मेडिकल कराने की कोई आवश्यकता नहीं थी। वहीं इस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उसे बर्खास्त करने से पूर्व उसका पक्ष नहीं सुना गया। यहां तक की उसे मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से भी अवगत नहीं कराया गया। इसलिए उसके बर्खास्तगी आदेश को रद्द किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है।