जयपुर, 31 दिसंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह दौसा जिले के महुआ ब्लॉक में साल 1997 में तैनात महिला शिक्षक के सेवाकाल की गणना उसकी प्रथम नियुक्ति तिथि से करते हुए उसे समस्त सेवा परिलाभ अदा करने को कहा है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने यह आदेश सरूपी बाई मीणा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता विजय पाठक ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति साल 1997 में तृतीय श्रेणी शिक्षक पद पर हुई थी। याचिकाकर्ता ने 4 मार्च, 1997 को कार्यभार भी ग्रहण कर लिया था। बाद राज्य सरकार ने याचिकाकर्ता को ग्रीष्मावकाश का वेतन नहीं देने का निर्णय लिया और इस अवधि में उसकी सेवा ब्रेक मानी गई। इसके साथ ही उसे एक जुलाई से सेवा में नियमित मानते हुए वार्षिक वेतन वृद्धि, चयनित वेतनमान और वरिष्ठता आदि का लाभ दिया। याचिका में इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति मार्च माह में ही हो गई थी। ऐसे में उसकी सेवा की गणना भी उसी दिन से होनी चाहिए थी। राज्य सरकार की मनमानी से उसे सेवा परिलाभ देरी से दिए गए और इस कारण वह अपने साथी शिक्षकों से पिछड गई। इसलिए उसकी प्रथम नियुक्ति तिथि से ही सेवा काल की गणना करते हुए समस्त परिलाभ दिए जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए हुए अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता को समस्त सेवा परिलाभ प्रथम नियुक्ति तिथि से गणना कर अदा करें।