धमतरी, 18 फ़रवरी ।छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में किसानों की आय बढ़ाने और पोषण सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने “मोरिंगा (सहजन) की खेती, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि” विषयक परियोजना को स्वीकृति प्रदान की है। यह परियोजना कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, कुरूद में संचालित होगी, जो इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध है।
जिला प्रशासन द्वारा आज बताया गया है कि परियोजना का नेतृत्व सहायक प्राध्यापक डॉ. पीयूष प्रधान करेंगे। एक वर्ष की अवधि में संचालित इस योजना के तहत प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र सिर्री (जिला धमतरी) और प्रौद्योगिकी ग्राम केंद्र रामपुर (जिला कबीरधाम) में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र में लगभग 50 किसानों को उन्नत तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देकर प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत किसानों को मोरिंगा की उन्नत उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन, वैज्ञानिक कटाई, भंडारण पद्धति और मूल्य संवर्धित उत्पादों के निर्माण की जानकारी दी जाएगी। मोरिंगा पाउडर, न्यूट्रीशन सप्लीमेंट, चाय, खाद्य पूरक जैसे उत्पादों के निर्माण से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
मोरिंगा को ‘चमत्कारी पौधा’ कहा जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन पाए जाते हैं। कम लागत और न्यून जोखिम वाली यह फसल जलवायु परिवर्तन के दौर में टिकाऊ विकल्प के रूप में उभर रही है। यह पहल कुपोषण उन्मूलन, महिला स्व-सहायता समूहों की भागीदारी और युवाओं के लिए सूक्ष्म उद्यमिता के अवसरों को भी बढ़ावा देगी। परिषद द्वारा इस परियोजना के लिए लगभग 4.95 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. नवनीत राणा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित नवाचार कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के विस्तार को गति दे रहे हैं। यह परियोजना और नवाचार न केवल संस्थान बल्कि पूरे जिले के लिए गौरव का विषय हैं। इससे कृषि अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी और किसानों को आय बढ़ाने के साथ पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में ठोस आधार प्राप्त होगा।
इसी क्रम में महाविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. ए. कुरैशी को उनके अभिनव कृषि उपकरण के लिए भारत सरकार से डिज़ाइन पेटेंट प्राप्त हुआ है। उनकी टीम द्वारा विकसित “ट्री ट्रिमिंग शीयर विद लॉक” उपकरण वृक्षों की छंटाई को अधिक सुरक्षित, सरल और प्रभावी बनाता है। यह विशेष रूप से फलोद्यान एवं बागवानी किसानों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा तथा श्रम लागत कम करने में सहायक होगा।